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भूकंपरोधी हैं इस शैली से बने चौकट भवन

Thu, 11 Feb 2016 05:02 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 11 Feb 2016 05:02 PM IST
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Earthquake Resistant house.

ऐसे वक्त में जब हिमालयी क्षेत्र में बड़े भूकंप के खतरे से विज्ञानी चिंतित हैं, यमुना घाटी की सदियों पुरानी भवन निर्माण शैली कोटी बनाल को फिर से प्रचलित करने का इरादा किया जा रहा है।

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यमुना घाटी में इस शैली से बने चार मंजिला (चौकट) और दूसरे भवनों को पुरातत्व और संस्कृति विभाग संरक्षित करेगा। साथ ही इन भवनों को टूरिज्म सेंटर बनाने की भी योजना है। इस संबंध में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पुरातत्व और संस्कृति विभाग को निर्देश दिए हैं।
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यमुना बेसिन में इस वास्तु शिल्प से भवन बनाने की शुरुआत हजारों साल पहले हुई थी। रंवाई घाटी में जो भवन बने हैं, वे छह सौ से एक हजार साल पुराने हैं। इस अरसे में प्रदेश के उत्तरकाशी, चमोली आदि हिमालयी क्षेत्रों ने भूकंप के कई बड़े झटके झेले, लेकिन इन भवनों का बाल बांका न हुआ।
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मूलत: यमुना बेसिन की इस भवन निर्माण शैली से गंगा बेसिन के रैथल गांव में भी कुछ मकान बने हुए हैं। इस संबंध में आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र ने भी सर्वे किया था। इसकी रिपोर्ट प्रदेश शासन को दी गई थी।

यमुना घाटी में काम कर रहे संस्थाओं ने शासन को कोटी बनाल शैली को फिर से प्रचलित करने का सुझाव दिया है। इस पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यमुना बेसिन में काम करने वाले लोगों तथा पुरातत्व और संस्कृति विभाग के साथ बैठक करके इन भवनों को संरक्षित करने का आदेश दिया।

विभाग इन चौकट भवनों के प्रथम तल को टूरिस्ट सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना बना रहे हैं। यमुना घाटी में काम कर रहे समाजसेवी विजेंद्र रावत ने बताया कि भोपाल के पुरातत्व म्यूजियम में कोटी बनाल वास्तु शिल्प सुरक्षित है। छह साल पहले यहां से इस विधा के जानकार राज मिस्त्री को ले जाकर ‘स्ट्रक्चर’ तैयार करवाया गया।

यमुना घाटी के इस पुरातन कोटी बनाल वास्तु शिल्प से देश-विदेश के सैलानियों को परिचित कराने के लिए राजधानी में भी यह भवन तैयार करने की विभागों की योजना है।


यह है कोटी बनाल शैली

मजबूत प्लेटफार्म पर इस वास्तु शिल्प से भवन लकड़ी और पत्थर के बनाए जाते हैं। लकड़ी के खंभों के बीच पत्थरों को ऐसे तैयार किया जाता है कि प्रेशर कम से कम रहे। भवन में एक दरवाजा रखा जाता है। ये भवन चार-मंजिल तक होते हैं। अमूमन हर मंजिल एक कमरे की होती है। भूकंप से सुरक्षा के अलावा इनकी सबसे ऊपर छत ढलवा होने के कारण बर्फबारी से सुरक्षा रहती है।

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