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दुर्गाष्टमी पर नहीं मिली 'दुर्गा'
अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Sat, 12 Oct 2013 08:55 PM IST
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देश में लड़कियों की घटती संख्या अब सामाजिक प्रथाओं पर भी भारी पड़ने लगी है। दुर्गाष्टमी पर कन्याओं को खिलाने का रिवाज है। हालत ये है कि लोग रामनवमी व्रत तो पूरे नौ दिन रख लेते हैं लेकिन उसके पूर्ण होने की शर्त अब भारी पड़ने लगी है।
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देवभूमि उत्तराखंड में अष्टमी पर कंजिका पूजन के लिए कन्याओं की कमी महसूस की गई। व्रत रखे लोगों ने जिमाने के लिए कन्याओं के लिए कई कई घरों की खाक छानी। जानकार इसे समाज में बढ़ती कन्या भ्रूण हत्या का दुष्परिणाम मानते हैं। उनका कहना है कि एक ओर समाज नवरात्र में देवी आराधना कर सुख, समृद्धि का वरदान चाहता है जबकि दूसरी ओर देवीस्वरूपा कन्याओं से परहेज करता है।
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कंजिकाओं को जिमाया गया
शनिवार को शारदीय नवरात्र अष्टमी पर्व पर हरियाली काटने के बाद कंजिकाओं को जिमाया गया। पर्व पर क्षेत्र में कई स्थानों पर कन्याओं की कमी देखने को मिली। कई लोग कन्याओं को जिमाने के लिए दूसरे मोहल्लों में ढूंढते नजर आए। स्थिति यह थी कि एक कन्या को एक से अधिक घरों से पूजन-जिमने का आमंत्रण स्वीकारना पड़ा।
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कन्या भ्रूण हत्या का कारण
कई घरों में पूजन के लिए पहुंची कन्याओं को लेने के लिए दूसरे लोग दरवाजे पर इंतजार करते देखे गए। सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रवीर पोखरियाल, शिक्षक अशोक क्रेजी, रामकृष्ण पोखरियाल, सुनील थपलियाल इसे बढ़ती कन्या भ्रूण हत्या का कारण मानते हैं। उनका कहना है कि सभ्य और पढ़ा लिखा समाज भी इस स्थिति के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। उनका कहना है कि कोख में पल रही बालिका की हत्या करने की मानसिकता नहीं बदली गई तो आने वाले समय में लिंगानुपात के भारी अंतर से समाज में खतरनाक स्थितियां पैदा हो सकती हैं। लिहाजा समय रहते समाज को जागरूक होने की जरूरत है।
दहशरा मेला आज
विजयदशमी पर दशहरा मेला और रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हिमालयन इंस्टीट्यूट जौलीग्रांट रिक्रेयशन क्लब की ओर से परिसर में दशहरा मेला आयोजित किया जाएगा। क्लब अध्यक्ष डा. हर्ष बहादुर ने बताया कि विजयदशमी के पर्व पर रावण दहन किया जाएगा। डोईवाला केशवपुरी बस्ती में रावण दहन, मेला आयोजित किया जाएगा।