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Dehradun News: मशीन खराब होने से एक साल से नहीं हो रही जांच, मरीज परेशान
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गर्भवती और मरीजों को विकासनगर और देहरादून का लगाना पड़ रहा चक्कर
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की पैथोलॉजी लैब की बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन बीते एक साल से खराब पड़ी है। जिसके चलते रोगियों के साथ ही गर्भवती महिलाओं के टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को विकासनगर से लेकर देहरादून तक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे समय और पैसे की बर्बादी हो रही है।
मशीन से सामान्य रोगियों तथा गर्भवती महिलाओं की शुगर, कोलेस्ट्रोल, किडनी फंक्शन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट आदि अत्यावश्यक जांचें की जाती हैं। मरीजों और गर्भवती महिलाओं की जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाज किया जाता है। विकासखंड कालसी के 311 राजस्व ग्रामों से जुड़े लोग यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं।
बायोकेमेस्ट्री एनालाइजर मशीन खराब होने के चलते मजबूरन उन्हें विभिन्न जांच राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की पैथोलॉजी में कराने पड़ते हैं। जिसकी रिपोर्ट दो से तीन दिन बाद प्राप्त होती है, या फिर मरीज को जांच के लिए विकासनगर या देहरादून स्थित निजी पैथोलॉजी लैब में जाना पड़ता है। जिसमें समय तथा पैसा दोनों ही अधिक लगता है।
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स्थानीय निवासी चतर सिंह, प्रताप सिंह, उर्मिला देवी आदि का कहना है कि केंद्र में रोजाना 100-150 की ओपीडी होती है। जिसमें से करीब 50 मरीजों के लिए डॉक्टर जांच के लिए लिखते है, लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में मरीज को जांच के लिए विकासनगर और देहरादून की दौड़ लगानी पड़ती है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की पैथोलॉजी लैब की बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन बीते एक साल से खराब पड़ी है। जिसके चलते रोगियों के साथ ही गर्भवती महिलाओं के टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को विकासनगर से लेकर देहरादून तक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे समय और पैसे की बर्बादी हो रही है।
मशीन से सामान्य रोगियों तथा गर्भवती महिलाओं की शुगर, कोलेस्ट्रोल, किडनी फंक्शन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट आदि अत्यावश्यक जांचें की जाती हैं। मरीजों और गर्भवती महिलाओं की जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाज किया जाता है। विकासखंड कालसी के 311 राजस्व ग्रामों से जुड़े लोग यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं।
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बायोकेमेस्ट्री एनालाइजर मशीन खराब होने के चलते मजबूरन उन्हें विभिन्न जांच राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की पैथोलॉजी में कराने पड़ते हैं। जिसकी रिपोर्ट दो से तीन दिन बाद प्राप्त होती है, या फिर मरीज को जांच के लिए विकासनगर या देहरादून स्थित निजी पैथोलॉजी लैब में जाना पड़ता है। जिसमें समय तथा पैसा दोनों ही अधिक लगता है।
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स्थानीय निवासी चतर सिंह, प्रताप सिंह, उर्मिला देवी आदि का कहना है कि केंद्र में रोजाना 100-150 की ओपीडी होती है। जिसमें से करीब 50 मरीजों के लिए डॉक्टर जांच के लिए लिखते है, लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में मरीज को जांच के लिए विकासनगर और देहरादून की दौड़ लगानी पड़ती है।