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Dehradun News: आठ साल पहले बना फायर सर्विस एक्ट होगा खत्म, नया कानून लेगा जगह

Sun, 05 Nov 2023 12:33 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 05 Nov 2023 12:33 AM IST
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Due to lack of rules, the Fire Service Act could not
Iअब केंद्र सरकार के नए मॉडल फायर सर्विस बिल के हिसाब से होगी नियमावली
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I2016 में बना था फायर सर्विस एक्ट, नियमावली नहीं हो सकी थी तैयारI

राज्य गठन के 16 साल बाद फायर सर्विस एक्ट बना था। लेकिन, नियमावली न होने से फायर सर्विस एक्ट को इसकी शक्तियां नहीं मिल सकी। अब इसके भी खत्म होने की बारी आ गई है। इसकी जगह अब नया कानून लेने वाला है। केंद्र सरकार मॉडल फायर सर्विस बिल लाई है। इसके हिसाब से ही नियमावली तैयार कर ली गई है। जल्द ही नया कानून अस्तित्व में आने के बाद फायर सर्विस एक्ट को लापरवाही पर कार्रवाई व दूसरी शक्तियां मिल जाएंगी।

राज्य गठन के कई सालों तक उत्तराखंड में फायर सर्विस एक्ट नहीं था। इसके न होने से लापरवाही से होने वाले अग्निकांड में विभाग कोई कार्रवाई भी नहीं कर सकता है। उसके पास तो यह भी अधिकार नहीं कि किसी संस्थान या व्यक्ति को लीगल नोटिस तक भेज सके। दूसरी तरफ, कार्रवाई न होने के चलते बहुत से प्रतिष्ठानों के मालिकान भी अग्निशमन विभाग के अनापत्ति प्रमाणपत्र का नवीनीकरण नहीं कराते हैं। दरअसल, कोई भी विभाग उसके खुद के एक्ट के तहत ही कानूनी कार्रवाई कर या करा सकता है। मसलन, लापरवाही के चलते किसी को लीगल नोटिस देना, जुर्माना लगाना आदि।
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इस जरूरत को देखते हुए वर्ष 2016 में उत्तराखंड फायर सर्विस एक्ट को मंजूरी मिली थी। इसके लिए नियमावली बनाने की बात आई तो कभी फाइल शासन में अटक जाती थी तो कभी किसी आपत्ति को लेकर लौटा दी जाती थी। इसी तरह आठ साल बीत गए। लेकिन, अब इस एक्ट के ही खत्म होने की बारी आ गई। डीआईजी फायर सर्विस निवेदिता कुकरेती ने बताया कि केंद्र सरकार के मॉडल फायर सर्विस बिल के तहत ही सारी तैयारियां हो चुकी हैं। जल्द ही मुख्यालय के माध्यम से इसे शासन को भेजा जाएगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर सभी राज्यों को इस कानून को लागू करना है। ऐसे में उम्मीद है कि नया कानून उत्तराखंड में भी जल्द ही लागू हो जाएगा।
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Iएफएसओ को मिलेगी जलापूर्ति करने की शक्तिI

उत्तर प्रदेश में नए कानून को लागू कर दिया गया हैं। इसमें अग्निशमन अधिकारी यानी एफएसओ को जलापूर्ति करने की शक्ति दी गई है। किसी का भी जल स्रोत होने पर जलापूर्ति कराना अनिवार्य होगा। एफएसओ इनसे जलापूर्ति करने के लिए करार कर सकता है। कोई भी स्रोत का मालिक जल लेने से मना नहीं कर सकता। ऐसा करने पर उसे जुर्माना या सजा का प्रावधान किया गया है। इसका जुर्माना 50 हजार रुपये तक हो सकता है। इसी तरह से उत्तराखंड में इस कानून को लागू किया जाना है।
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