हिमालय के अशांत भूगर्भ ने दिए बेहद चौंकाने वाले संकेत
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हिमालयी क्षेत्र बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। यहां जलवायु परिवर्तन और गरमाते वातावरण को वैज्ञानिक सामान्य बात नहीं मान रहे हैं।
हिमालयी क्षेत्र में दो दशक से अधिक समय तक काम कर चुके वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि फिलहाल हिमालय में ‘सूखा चक्र’ यानी ‘ड्रॉट साइकिल’ की शुरूआत हो चुकी है।
हिमालय केबाहरी वातावरण में आ रहा बदलाव और हिमालय में एवरेस्ट केनीचे इटली के वैज्ञानिक फिरेगिल पोरेटी की लैब में भूगर्भ में चल रही गतिविधियों के जो आंकड़े आ रहे हैं वे अच्छे संकेत नहीं दे रहे।
वैज्ञानिकों को आशंका है कि एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र संक्रमण काल के चक्र से गुजर रहा है। कम से कम 50 हजार साल से अधिक चलने वाले इस चक्र को हिमालय एक बार पहले भी झेल चुका है।
और बढ़ेगा हिमालय पर तापमान
शोध करने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक ग्लेशियरों का गलना, बर्फबारी और तेज बारिश ‘सूखा चक्र’ के शुरुआती लक्षण हैं। यह मानसून के मिजाज में भी तब्दीली ला सकता है।
इन शुरुआती संकेतों से भविष्य में हिमालय क्षेत्र की तस्वीर फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पा रही है। हालांकि यह तय माना जा रहा है कि प्राकृतिक नियम चक्र से यह क्षेत्र एक बार फिर नए बदलाव से गुजरेगा।
वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिक साइमन क्लेमपरर का मानना है कि आने वाले 50 सालों में हिमालयी क्षेत्र का तापमान और बढ़ेगा। इससे सूखा बढ़ेगा, अनियमित और तेज बारिश होगी। इन बदलावों के चलते न तो हिमालय में पानी रुकेगा और न ही ग्लेशियरों के पिघलने से बर्फ जम सकेगी।
घटेगा मानसून
पोस्टर्डम यूनिवर्सिटी, जर्मनी के हिमालयी भूगर्भ वैज्ञानिक रैसमस सी थीडे ने बताया कि हिमालयी क्षेत्र के भूगर्भ में भी गतिविधियां तेज हैं। इंडियन प्लेट प्रति वर्ष दो सेमी हिमालय के नीचे घुस रही है। यह हिमालय के बाहरी और अंदरूनी हिस्से में किसी नए बदलाव का संकेत दे रही है। प्रारंभिक संकेतों के मुताबिक गर्मियों का मानसून काफी घट सकता है।