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दवा की दुकानों पर मारा छापा, तीन कराईं बंद, लाइसेंस निलंबित करने की भी सिफारिश

Wed, 25 Aug 2021 01:50 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 25 Aug 2021 01:50 AM IST
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Drug shops were raided, three got closed, also recommended suspension of license
मेडिकल स्टोर पर छापा मारती औषाधि नियंत्रण विभाग की टीम। संवाद - फोटो : DEHRADUN
औषधि नियंत्रक विभाग की टीम ने मंगलवार को शहर की कई दवा दुकानों पर छापा मारा। इस दौरान अनियमितता पाए जाने पर तीन दुकानों के दवा बेचने पर रोक लगाते हुए उन्हें बंद करवा दिया गया। साथ ही उनके लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश भी की गई है। इसके अलावा टीम ने 15 दवाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए भी भेजे हैं।
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राजधानी समेत देहात क्षेत्रों में मेडिकल स्टोरों पर बेची जा रही नकली दवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे जांच अभियान के तहत सहायक औषधि नियंत्रक की अगुवाई में टीम ने मेडिकल स्टोरों पर छापे मारे। दून अस्पताल के आसपास, प्रेमनगर, कैंट रोड, अधोईवाला, राजपुर रोड, कांवली रोड, चकराता रोड समेत कई इलाकों में स्थित मेडिकल स्टोरों की जांच पड़ताल की। टीम ने 15 दवाइयों के नमूने लिए जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। सहायक औषधि नियंत्रक एवं अनुज्ञापन प्राधिकारी एसएस भंडारी ने बताया कि सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम की धाराओं के तहत नोटिस जारी किया गया है। दवाइयों के नमूने फेल पाए जाने पर संबंधित मेडिकल स्टोर संचालकों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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विभागीय कार्रवाई को लेकर मेडिकल स्टोर संचालकों में अफरा तफरी का माहौल रहा। कई इलाकों में मेडिकल स्टोर संचालक शटर गिराकर भाग गए। कार्रवाई के दौरान वरिष्ठ औष्रधि निरीक्षक नीरज कुमार, विजिलेंस के उपनिरीक्षक जगदीश रतूड़ी, संजय नेगी, योगेंद्र सिंह, समेत कई अधिकारी, कर्मचारी शामिल थे।
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गंदगी देख संचालकों को लगायी फटकार
कार्रवाई के दौरान कई मेडिकल स्टोरों में जबरदस्त गंदगी पाए जाने पर सहायक औषधि नियंत्रक भंडारी ने संचालकों को कड़ी फटकार लगायी। उन्होंने संचालकों को चेतावनी दी कि यदि दोबारा जांच में गंदगी पायी गई तो लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। उन्होंने स्टोरों में बेतरतीब तरीके से रखी दवाइयों को लेकर भी कड़ी नाराजगी जतायी।

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कई स्टोरों से खांसी के सीरप नदारद
औचक जांच के दौरान कई मेडिकल स्टोरों से खांसी के सीरप नदारद पाए गए। ऐसे में टीम में शामिल अधिकारियों ने हर माह मंगाए जाने वाले खांसी के सीरप का ब्यौरा मांगा। ज्यादातर संचालक ब्यौरा नहीं दे पाए। एसएस भंडारी ने बताया कि उनके संज्ञान में आया है कि कई युवाओं द्वारा खांसी के सीरप का नशे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में उन्हीं मरीजों को ही सीरप दिए जाएं जिन्हें जरूरत है।
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