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मानवनिर्मित 'आपदा' में फंसे देहरादून के लोग

Tue, 17 Dec 2013 11:02 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 17 Dec 2013 11:02 AM IST
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doonites suffered from roads

पहाड़ के लोग आपदा के छह माह बाद भी जहां राहत और पुनर्निर्माण की बांट जोह रहे हैं, वहीं राजधानी के कई लोग बिना आपदा के ही आपदा जैसा दंश झेल रहे हैं।

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अस्पताल तक नहीं जा पा रहे
देहरादून निवासी कैप्टन रजनी मैठाणी आजकल काफी दुखी और परेशान हैं। वजह है उनके घर के सामने खुदी सड़क। घर के सामने मलबे के ढेर ऐसे लगा दिए गए हैं कि वह अपने बूढ़े मां बाप को इलाज कराने के लिए अस्पताल तक नहीं ले जा पा रही हैं।
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कैप्टन रजनी कहती हैं कि जिस मां-बाप की देखभाल के लिए तीन साल पहले फौज की नौकरी को अलविदा कह दिया था, उन्हीं मां बाप का आज इलाज तक नहीं करा पा रही हूं। घर के सामने खुदी सड़क ने मुझे बेबस और असहाय बना दिया है।

मोथरोवाला रोड स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर मोड़ से ठीक पहले वाले मकान में रहने वाली कैप्टन रजनी मैठाणी बताती हैं कि करीब बीस दिन पहले घर के बाहर मेन गेट के सामने लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों ने जेसीबी से सड़क को खोदकर मलबा फैला दिया।

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सीमेंट के मलबे पर चलना अच्छे-खासे इंसान के लिए मुश्किल है। ऐसे में व्हील चेयर से बंधे बूढ़े पिता और घुटना बदलने के लिए आपरेशन की बाट जोह रही मां को रुटीन चेकअप तक के लिए अस्पताल ले जाना मुश्किल हो गया है।

रजनी बताती हैं कि जब खुदाई शुरू  की गई थी तो कर्मचारियों से गुहार लगाई थी कि गेट पर मलबा न डालें लेकिन किसी ने नहीं सुनी।

हालात से दुखी रजनी बताती हैं कि दिल्ली के कृषि विभाग में प्रशासनिक अधिकारी रहे पिता डीआर मैठाणी पैरालिसिस के शिकार तो थे ही, कुछ समय पहले गिरने से हिप बोन फ्रैक्चर भी हो गया।

मां सरोज का घुटना बदला जाना है। चोट की वजह से उनकी एक हड्डी भी चटक गई है। लेकिन खुदी सड़क उनके इलाज में रोड़ा बन गई।

हरिद्वार बाईपास से बंगाली कोठी तक चौड़ीकरण का कार्य होना था, जो पूरा हो गया है। अब बंगाली कोठी से सिद्धेश्वर महादेव मंदिर तक सड़क निर्माण किया जाना है। खुदाई उसी के लिए हुई है, लेकिन खुदाई के बाद मलबा गेट के आगे नहीं डाला जा सकता। अगर ऐसा किया गया है तो कार्रवाई होगी।
- वीएन चौधरी, पीडब्लूडी, निर्माण खंड

रोड की रोड़ी से गुरुद्वारे की राह कठिन
देहरादून के प्रेमनगर वार्ड दो के विंग नंबर तीन स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब में हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु अरदास और मन्नतें मांगने आते हैं। लेकिन सरकारी लापरवाही ने इनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।


विंग में सड़क निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे सड़क पर रोड़ी बिखरी है। लोगों का कहना है कि स्थानीय सभासद और राजनेताओं की लड़ाई के चलते काम पूरा नहीं हो रहा।

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ऐसे में ग्यारह, इक्कीस, चालीस दिनों तक की मन्नत मांगने वाले लोग जब यहां से नंगे पैर गुजरते हैं तो पथरीली राह उनके पैरों में जख्म दे देती है। इसके अलावा पास ही स्थित अस्पताल में आने वाले मरीजों को खासी परेशानी होती है।

लोगों की जुबानी
मैं रोज सुबह-शाम नंगे पैर गुरुद्वारे जाती हूं। सड़क पर बिखरी रोड़ी से बड़ी परेशानी होती है।
- राजकुमारी तनेजा

16 साल से नियमित गुरुद्वारे जा रही हूं। रोड नहीं बननी है तो कम से कम रोड़ी तो हटाई जाए।
- अनीता बुटोला

कुछ लोगों ने अपनी तरफ तो रोड बनवा ली, लेकिन आधा हिस्सा छोड़ दिया। नेता लोग अपने गली-मोहल्लों में काम करवा लेते हैं, बाकी लोगों से उन्हें कोई मतलब नहीं रहता। गुरुद्वारे में मन्नत मांगने आने वाले श्रद्धालुओं की दिक्कत इन नेताओं को नजर नहीं आती।
- मनमोहन सिंह, प्रधान, दमदमा साहिब गुरु द्वारा

जिस ठेकेदार को सड़क का काम दिया था, वह घटिया सामग्री इस्तेमाल कर रहा था। इससे आधी बनी सड़क उधड़ गई। इस पर काम रुकवाया गया है। जल्द ही यह पूरी सड़क नए सिरे से बनाई जाएगी। इस पर काम की गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
- ओमप्रकाश, स्थानीय सभासद

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