दून अस्पताल: चार दिन बाद सफाईकर्मियों की भूख हड़ताल सशर्त खत्म, काम पर लौटे कर्मचारी तो मिली राहत
हड़ताल के चौथे दिन मंगलवार को भी दोपहर तक अस्पताल की आईपीडी में सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। वार्डों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे थे।
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चार दिनों से गंदगी और दुर्गंध से जूझ रहे दून अस्पताल के मरीजों और तीमारदारों को मंगलवार को राहत मिली। समान कार्य-समान वेतन की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे करीब 100 उपनल सफाई कर्मचारी दोपहर बाद काम पर लौट आए। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने कर्मचारियों के बीच पहुंचकर भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारी हरिओम को जूस पिलाया। साथ ही उनकी मांगों के समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने सशर्त आंदोलन खत्म किया।
हड़ताल के चौथे दिन मंगलवार को भी दोपहर तक अस्पताल की आईपीडी में सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। वार्डों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे थे। डस्टबिन भरने के कारण गंदगी फर्श पर फैल रही थी। कई जगहों पर कूड़ा जमा होने से उठ रही दुर्गंध के कारण मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। वार्डों में तैनात नर्सिंग स्टाफ के लिए भी गंदगी के बीच काम करना मुश्किल हो रहा था।दोपहर बाद चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना कर्मचारियों के बीच पहुंचे।
उन्होंने कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं और मांगों पर शासन स्तर से कार्रवाई का भरोसा दिलाया। प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने भी कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि शासन की ओर से गठित कमेटी उनकी समस्याओं पर सकारात्मक निर्णय लेगी। अधिकारियों के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी। उनके काम पर लौटने से अस्पताल प्रबंधन राहत की सांस ली है।
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अपर सचिव की अध्यक्षता में गठित हुई कमेटी
कर्मचारियों की मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए शासन ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। अपर सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं शिक्षा रोहित मीणा को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय ने सोमवार को कमेटी गठन के आदेश जारी किए थे। कमेटी कर्मचारियों के मानदेय, समान कार्य-समान वेतन और अन्य मांगों पर विचार कर आगे की कार्रवाई के लिए निर्णय लेगी।
सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर शासन स्तर पर गठित कमेटी की जल्द बैठक होगी। समान कार्य-समान वेतन और अन्य समस्याओं के निराकरण के संबंध में कमेटी जो निर्णय लेगी, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा विभाग उत्तराखंड