शर्मनाक: कोख में मरा बच्चा लिए दस दिन तड़पती रही महिला, सरकारी अस्पताल में किसी को नहीं आया तरस
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महज कुछ पैसों का इंतजाम न हो पाने के कारण एक महिला पेट में मरा हुआ बच्चा लिए दस दिनों तक तड़पती रही। उसका पति गुहार लगता रहा, लेकिन कोई मदद नहीं मिल पाई। यह हाल है राजधानी के दून महिला अस्पताल में सिस्टम की काहिली का।
दरअसल महिला के ऑपरेशन के लिए खून की जरूरत थी। इसके लिए या तो पैसे चाहिए थे या कोई रक्तदाता। एक युवक ने मदद का ढोंग किया, लेकिन वह महिला के नाम पर चंदा जुटाकर फरार हो गया। आखिरकार एक समाजसेवी ने अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया तो महिला की जान बच पाई।
दरअसल दून महिला अस्पताल में 10 जुलाई को हरिद्वार निवासी सुनीता को गर्भस्थ शिशु की मौत होने पर भर्ती कराया गया था। सुनीता की हालात नाजुक होने के चलते डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए पति विष्णु से खून का इंतजाम करने को कहा था।
लेकिन, आर्थिक तंगी के कारण वह कुछ नहीं कर पाया। इसी बीच वहां आए एक युवक ने मदद का आश्वासन दिया और पीड़िता का हवाला देकर अस्पताल कर्मचारियों से सात हजार रुपये जुटा लिए।
उसने वादा किया कि महिला के इलाज के लिए जहां पैसे की जरूरत होगी वह देता रहेगा। इसके बाद युवक ने बाहर से पानी लाने का बहाना बनाकर वहां से फरार हो गया। महिला का पति लगातार मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन अस्पताल प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा।
इसी बीच उन्हें एक समाजसेवी के बारे में जानकारी मिली। पति ने उन्हें फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी। बुधवार को वे अस्पताल पहुंचे और रक्तदान किया। इसके बाद ही महिला का ऑपरेशान हो पाया।
मामला में संज्ञान में नहीं है। कल संबंधित डॉक्टरों ने इस संबंध में जानकारी मांगी जाएगी। अगर, अस्पताल प्रशासन की कमी समाने आती है तो उनपर कार्रवाई की जाएगी।
-आशुतोष सयाना, दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य