मरीजों पर आफत बन टूटी डॉक्टरों की हड़ताल
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चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार के अल्टीमेटम के बावजूद सरकारी अफसर दो दिन की छुट्टियों की खुमारी में डूबे रहे। फिलहाल, मांगों पर सकारात्मक विचार करने के आश्वासन पर डाक्टरों ने अपना कार्य बहिष्कार वापस ले लिया है।
प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ ने 10 अप्रैल को अधीक्षक डॉ. बीसी जोशी की विजिलेंस टीम द्वारा गिरफ्तारी के विरोध में स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को पत्र लिखा था। संघ ने साफ किया था कि अगर सरकार सोमवार तक उनकी मांगें नहीं मानती तो सोमवार से ओपीडी बहिष्कार करेंगे।
सरकार ने नहीं किए वार्ता के प्रयास
11 अप्रैल को दोबारा संघ ने बैठक कर कार्य बहिष्कार के निर्णय पर अडिग रहने का ऐलान किया। सरकारी दफ्तर बंद होने के चलते न तो स्वास्थ्य मंत्री, न ही विभाग ने मामले का संज्ञान लिया। रविवार तक संघ से वार्ता के लिए प्रयास नहीं किए गए।
हालांकि स्वास्थ्य मंत्री ने यह दावा किया था कि प्रमुख सचिव और महानिदेशक को वार्ता के लिए कहा गया है। ओपीडी बंद कर प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ के पदाधिकारी शासन से वार्ता के लिए पहुंचे। डॉ. जोशी की विजिलेंस टीम द्वारा गिरफ्तारी को अतर्कसंगत करार देकर न्यायिक जांच संघ की मुख्य मांग थी।
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओम प्रकाश और महाधिवक्ता यूके उनियाल बैठक में मौजूद रहे। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओम प्रकाश ने बताया कि चिकित्सकों की मांग पर महाधिवक्ता से विधिक राय ली गई। महाधिवक्ता की सहमति के बाद न्यायिक जांच करवाने के लिए प्रक्रिया पूरी कर आदेश जारी किए जाएंगे। अन्य मांगों पर फिलहाल कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ।
मौका भांप कर चिकित्सक भी बना रहे दबाव
काशीपुर प्रकरण की आड़ लेकर डाक्टरों ने अपने कई पुराने मुद्दों को भी मांगपत्र में शामिल कर लिया है। चिकित्सक पुरानी के अलावा नई मांगों का पिटारा लेकर पहुंचे, लेकिन शासन ने डॉ. जोशी की गिरफ्तारी प्रकरण के अलावा अन्य पर संज्ञान नहीं लिया है। वार्ता से पूर्व चिकित्सकों का कार्य बहिष्कार पर जाना भी सरकार को अखरा है।
प्रदेश में चिकित्सकों की कमी है। इसके चलते भी वह अपनी मांगों के लिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं। तीन दिन में चिकित्सकों की मांगों की फेहरिस्त बढ़ गई है। सोमवार को शासन से हुई वार्ता के बाद चिकित्सकों ने कई नई मांगें भी अपनी सूची में जोड़ दीं। शासन ने फिलहाल उनकी प्रमुख मांग डॉ. जोशी प्रकरण में न्यायिक जांच पर आश्वासन दिया।
डायनेमिक एश्योर्ड कॅ रियर प्रोगेशन (डीएसीपी) को केवल नवनियुक्त चिकित्सकों के लिए प्रभावी करने से पुराने चिकित्सक आहत हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें भी डीएसीपी का लाभ मिले। फिलहाल सरकार और शासन ने इन मसलों पर विधिक मांगी है।
इन मांगों पर होगा विचार, ली विधिक राय
महाधिवक्ता से शासन ने डॉ. बीसी जोशी की गिरफ्तारी की न्यायिक जांच के अलावा एनपीए (नान प्रैक्टिस अलाउंस) के मसले पर भी विचार-विमर्श किया है। डॉ. जोशी की गिरफ्तारी पर कई कानूनी खामियां सामने आई हैं। इसकी न्यायिक जांच संभव है। प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे।
एनपीए को स्पेशल पे करने के लिए भी महाधिवक्ता से विधिक राय ली है। डॉक्टर चाहते हैं कि एनपीए को विशेष वेतन का नाम दिया जाए। शासन जल्द ही चिकित्सक के घर पर मरीजों को देखने और राजपत्रित अवकाश पर ओपीडी चालू रखने की बाबत नए सिरे से दिशानिर्देश जारी करेगा। शासन ने इस संबंध में महानिदेशालय से प्रस्ताव मांगा है। घर पर इमरजेंसी इलाज के नाम पर प्रैक्टिस करने वालों पर भी सख्ती होगी।
मानवता के नाते ओपीडी खोली, बोले हड़तालियों के साथ
प्रदेश भर में जहां डॉक्टरों ने ओपीडी ठप रहखी वहीं हल्द्वानी महिला अस्पताल और बेस चिकित्सालय में डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों की जांच की। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के कुमाऊं सचिव डॉ. प्रदीप पांडे ने बताया कि मरीज सुबह से ही लाइन में थे और अपने पर्चे बनवा चुके थे। लिहाजा मानवता के नाते उक्त अस्पतालों में मरीजों के लिए ओपीडी खोली गई। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे डॉक्टरों के आंदोलन में साथ हैं।