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डॉक्टरों की मनमानी: जेनेरिक की जगह खरीदी ब्रांडेड दवाएं
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 24 Oct 2015 02:34 AM IST
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सरकारी अस्पताल में मरीजों को जेनेरिक दवाएं लिखने के शासनादेश के बावजूद दून अस्पताल के डॉक्टरों ने ब्रांडेड दवाओं की लोकल परचेज (एलपी) की। एलपी की जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया है कि करीब 80 डॉक्टरों के लगातार ब्रांडेड दवाओं की एलपी की।
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जेनेरिक दवा खरीदने के हैं आदेश
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जेनेरिक दवा लिखने के संबंध में शासन ने डॉक्टरों को आदेश जारी किये थे। 18 मार्च 2010 को तत्कालीन प्रमुख सचिव स्वास्थ्य केशव देशिराजु ने महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को जेनेरिक दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
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विशेषकर एलपी में जेनेरिक दवाओं की खरीद अनिवार्य करने को कहा गया था। इसके बाद स्वास्थ्य महानिदेशक, सीएमओ और पीएमएस के स्तर से भी कई बार डॉक्टरों को निर्देश जारी किए गए। लेकिन डॉक्टरों ने ब्रांडेड दवाएं खरीदना नहीं छोड़ा।
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80 डॉक्टरों के खिलाफ हुई पुष्टि
अस्पताल में हुई करोड़ों की एलपी खरीद का मामला उछलने के बाद स्वास्थ्य महानिदेशालय ने दून ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की निदेशक डॉ. आभा ममगाईं के नेतृत्व में टीम गठित की। सूत्रों की माने तो शुरुआती जांच में करीब 80 डॉक्टरों के लगातार ब्रांडेड दवाओं की एलपी करने की पुष्टि हुई है।