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डॉक्टर ने 'जिद' कर बचाई मरीज की जान

Wed, 10 Sep 2014 08:25 AM IST
नरेश थपलियाल/अमर उजाला, कोटद्वार
नरेश थपलियाल/अमर उजाला, कोटद्वार Updated Wed, 10 Sep 2014 08:25 AM IST
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doctor operate patient without his permission

डॉक्टर को शायद इसीलिए धरती के ‘भगवान’ का दर्जा दिया गया है। कई बार डॉक्टर मरीज की मर्ज की गंभीरता और जान खतरे में देखकर खुद ही रिस्क लेने को तैयार हो जाता है।

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ऐसा मामला सामने आया है उत्तराखंड के राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार में। अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉक्टर अरुण कुमार पांडे ने तीमारदारों की मनाई के बाद भी एक किशोर का आपरेशन करके उसकी जान बचा ली।
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16 वर्ष के श्रवण कुमार का टायफायड बिगड़ने के बाद पेट की आंत फट गई थी और जहर फैल गया था। डॉक्टर पांडे के साथ दो और डॉक्टरों ने करीब दो घंटे के जटिल आपरेशन के बाद श्रवण को नया जीवन दिया।
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रिखणीखाल ब्लाक के धैड़ गांव निवासी मनोहर लाल और सतेश्वरी देवी का 16 वर्षीय बेटा श्रवण कुमार जीआईसी द्वारी में 11वीं छात्र है। वह एक माह से बुखार से पीड़ित था। उसे पेट में हल्के दर्द की शिकायत हुई। 25 अगस्त को दर्द बढ़ा तो परिजन उसे पाणीसैंण स्थित प्राइवेट डॉक्टर के पास ले गए लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।

ऑपरेशन की सलाह

doctor operate patient without his permission

फिर 27 अगस्त की रात को परिजन उसे राजकीय चिकित्सालय कोटद्वार ले आए। 28 अगस्त की सुबह डा. अरुण कुमार पांडे ने श्रवण की जांच करने के बाद परिजनों को ऑपरेशन की सलाह दी। मां सतेश्वरी देवी आपरेशन के नाम से घबरा गई और उन्होंने इंकार कर दिया।

कुछ दिनों बाद उसकी हालत और भी खराब हो गई। उसकी आंतों का जहर निकालने के लिए नली लगाई गई, लेकिन उसका भी असर नहीं हुआ। उसकी गंभीर हालत देखते हुए डा. पांडे ने बच्चे के जीवन को खतरा बताकर परिजनों को मुश्किल से आपरेशन के लिए तैयार किया।

मंगलवार सुबह डॉक्टर पांडे ने डा. स्नेहदीप आर्य और डा. कुमकुम के साथ इमरजेंसी ऑपरेशन की तैयारियां की। दो घंटे के जटिल आपरेशन के बाद फटी आंतों को जोड़ा और पेट में फैले जहर निकाला गया। डॉक्टर पांडे ने बताया कि बच्चे को होश नहीं आने तक पूरी टीम डरी हुई थी। लेकिन श्रणव के माता-पिता की दुआएं काम कर गई।

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