उत्तराखंड के सीएम को 'टोपी' पहना गए कई डीएम
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खाद्य सुरक्षा योजना को देश में सबसे पहले लागू करने का ऐलान करके उत्तराखंड की विजय बहुगुणा सरकार ने सबकी वाहवाही लूटी थी।
लेकिन जब योजना पर अमल करने की बात आई तो हरीश रावत की मौजूदा सरकार को उसी के जिलाधिकारियों ने ही फिसड्डी बना दिया।
यही नहीं, मुख्यमंत्री की बैठक में सभी जिलों में सौ फीसदी राशन कार्ड बनाने का सफेद झूठ भी बोल गए। लेकिन इस झूठ की पोल भी खुल गई।
सीएम के प्रमुख सचिव की बैठक में जिलाधिकारियों के दावों पर संदेह जताया गया। सत्यापन की प्रक्रिया शुरू में पता चला कि आधा दर्जन जिलों में अभियान ठंडा पड़ा है। खुलासे से शासन भी हैरान रह गया।
कई डीएम ने सीएम से बोला झूठ
खाद्य सुरक्षा योजना के तहत राशन कार्ड बनाने की समय सीमा 31 मई निर्धारित थी। इस बीच 25 मई की बैठक में जिलाधिकारियों ने कहा कि उनके जिलों में 100 प्रतिशत कार्ड बना दिए गए हैं।
दोबारा जून में बैठक हुई तो तब भी सभी डीएम यही दावा करते रहे कि राशन कार्ड बनाने का काम पूरा हो चुका है। इतना ही नहीं 22 जुलाई को मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ हुई बैठक में भी जिलाधिकारी अभियान को लेकर सरकार को गुमराह करते रहे।
इस दौरान बैठक में अभियान को लेकर गड़बड़ी के संकेत मिले तो 24 जुलाई को मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह संधू ने जिलाधिकारियों को बुलाकर जिलेवार सत्यापन शुरू कराया।
आधा दर्जन जिलों में अभियान की रफ्तार बेहद सुस्त
सत्यापन में कलेक्टरों के दावों की पोल खुल गई। अभियान को लेकर शासन को गुमराह करने की सच्चाई जानकर प्रमुख सचिव हैरान रह गए। पता चला कि आधा दर्जन जिलों में अभियान की रफ्तार बेहद सुस्त है।
खाद्य आपूर्ति मंत्री के इलाके में सिर्फ 33 फीसदी कार्ड बने
खाद्य आपूर्ति मंत्री प्रीतम सिंह के क्षेत्र चकराता में भी 33 प्रतिशत ही कार्ड बनने का खुलासा हुआ। प्रमुख सचिव संधू ने अब राशन कार्ड अभियान को पूरा करने के लिए जिलाधिकारियों को 31 जुलाई तक की मोहलत दी है।
राशन कार्ड किस जिले में कितना
पिथौरागढ़, देहरादून, नैनीताल, ऊधमसिंहनगर - (50-60 फीसदी)
टिहरी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चम्पावत - 70-80 प्रतिशत
उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार - 90 प्रतिशत
(सिर्फ चमोली में अभियान पूरा हुआ)
खाद्य विभाग के फीडबैक से खुली पोल
बैठक से पहले सीएम के प्रमुख सचिव ने खाद्य विभाग से फीड बैक लिया। जब अंतर आता दिखा तो यह भनक कई कलक्टरों को लग गई। सूत्र बताते हैं कि कुमाऊं के एक दो कलक्टरों ने बैठक में खुद ही मान लिया कि अभी लक्ष्य सौ फीसदी पूरा नहीं हुआ है।
क्या है खाद्य सुरक्षा योजना
पहली जुलाई 2014 को इस योजना को लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य था। प्रतिमाह पंद्रह हजार की आय से कम वाले परिवारों को प्रति यूनिट दो किलो गेहूं व तीन किलो चावल प्रति माह मिलेगा।
गेहूं की दर दो रुपये व चावल की दर तीन रुपए प्रति किलो होगी। इसके अलावा राज्य खाद्य सुरक्षा योजना में वो परिवार होंगे जिनकी एक महीने की आय 45 हजार से कम होगी।
इन्हें प्रति माह दस किलो गेहूं व पांच किग्रा चावल मिलेगा। गेहूं की दर 6.60 पैसे व चावल की दर 8.45 पैसे प्रति किलो होगी।
ये हुआ नुकसान
जिन पात्र परिवारों के कार्ड नहीं बन सके उन्हें अभी इस योजना का लाभ नहीं मिल सका। और, यदि और विलंब हुआ तो हजारों परिवार वंचित रह सकते हैं। हालांकि उनके लिए कैरी फॉरवर्ड की व्यवस्था रहेगी।
(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी ajitsingh@ddn.amarujala.com और इस नंबर- 9675812371 पर संपर्क कर सकते हैं।)