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डीएम साहब, बंदरों के आतंक से दिलाओ निजात
अमर उजाला, सतपुली
Updated Mon, 18 Nov 2013 04:43 PM IST
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उत्तराखंड में कोटद्वार के सतपुली, पाटीसैंण एवं गुमखाल कसबों में बंदरों ने क्षेत्रवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। सैकड़ों की तादात में हो चुके इन बंदरों ने स्थानीय ग्रामीणों, व्यापारियों एवं गृहणियों की नाक में दम कर दिया है। बंदरों के बढ़ते झुंडों से लोगों में दहशत बन गई है। बच्चों का अकेले स्कूल आना-जाना मुश्किल हो गया है।
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राहगीरों पर कर रहे हैं हमला
बंदरों के झुंड घरों में घुसकर सामान उठा ले जा रहे हैं। कस्बों में आए दिन बंदर राहगीरों पर हमला कर उनके हाथ से सामान छीन ले रहे हैं। जिससे लोगों में भय बना है। बसों की छतों से खाद्य पदार्थों के पैकेट एवं थैले फाड़कर सामान ले जाने और ग्रामीणों के हाथ से सामान छीन कर भी ले जा रहे हैं।
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खेती हुई तहस- नहस
वहीं छत पर कपड़े सुखाना एवं अन्य सामान रखना भी खतरे से खाली नहीं है। खाद्य पदार्थों को छीनने के चक्कर में हिंसक होकर यह बंदर कई मर्तबा ग्रामीणों को बुरी तरह से घायल भी कर चुके हैं। वहीं, घरों के निकट आंगन में ग्रामीणों द्वारा की जा रही छोटी-मोटी खेती को भी ये तहस-नहस कर दे रहे हैं। स्थानीय निवासी जयदीप नेगी, बालेश्वर चौधरी, सत्येंद्र रावत, ताजवर सिंह आदि ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की गुहार लगाई है।
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खाने की तलाश में पहुंच रहे बाजार
सतपुली, पाटीसैंण और गुमखाल कसबों में लोग दुकानों और घरों का कूड़ा निकटवर्ती क्षेत्र में ही डाल दे रहे हैं। कूड़े में खाने की तलाश में बंदर कसबों और समीपवर्ती गांवों तक पंहुच रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मैदानी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बंदर पकड़कर पास के जंगल में छोड़ दिए जाने से समस्या ने विकराल रुप धारण कर लिया है।