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प्रकृति से दूरियां बन रही कष्ट का कारण : खादर वल्ली
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इंडियन पब्लिक स्कूल में औषधि ही आहार है विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम का मंगलवार को समापन हो गया। प्रसिद्ध आहार विशेषज्ञ डॉ. खादर वल्ली ने कहा कि प्रकृति से दूर होने की वजह से हमारे कष्ट बढ़ रहे हैं। मोटे अनाज के सेवन से स्वास्थ्य में सुधार होता है। हम श्रीधान्य को अपनाएंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को बचा पाएंगे।
डॉ. वल्ली ने कहा कि वह पिछले 30 वर्षों से मोटा अनाज खाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। आज भारत सरकार ने श्रीधान्य को अपने प्रोजेक्ट में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है हम देर से जाग रहे हैं, लेकिन दुरुस्त रास्ते पर हैं। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज को लेकर हम सभी को समाज में जागरूकता फैलाने की जरूरत है। अब विदेशी भी इसे सुपर फूड, हेल्दी फूड और फ्यूचर फूड कहने लगे हैं। श्रीधान्य हम भारतीयों का भोजन रहा है। पिछले करीब 100 वर्षों से हमने इसे खाना छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि हम बीमार होते जा रहे हैं।
पूर्व राज्यसभा सांसद और विद्यालय निदेशक आरके सिन्हा ने कहा कि भारत सरकार श्रीधान्य के क्षेत्र में काम कर रही है। देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों में श्रीधान्य के क्षेत्र में काम किया जा रहा है। सरकार किसानों को प्रेरित कर रही है और अनुदान भी दे रही है। वरिष्ठ पत्रकार और इंदिरा गांधी कला केंद्र के अध्यक्ष पद्मश्री राम बहादुर राय ने कहा कि आज हम अपनी पारंपरिक चीजों को छोड़ चुके हैं। कहा कि सेहत की जगह स्वाद पर बल दिया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी किसान व स्थानीय लोगों को प्रमाणपत्र वितरित किया गया। इनमें चंद्रशेखर कुमार, रमेश चंद्र विश्वकर्मा, भगवान मिश्रा, राहुल वली, अनवर जैन, उदय सहाय, एके सिंह, बिशुंधर, ईलम चंद, संजय कुमार, राजीव, रंजीता आदि किसान और लोग शामिल रहे। इस मौके पर सेवानिवृत्त आईएएस और इंडियन पब्लिक स्कूल के कार्यपालक अध्यक्ष डीके कोटिया, वरिष्ठ पत्रकार राधा रमण आदि उपस्थित रहे।
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डॉ. वल्ली ने कहा कि वह पिछले 30 वर्षों से मोटा अनाज खाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। आज भारत सरकार ने श्रीधान्य को अपने प्रोजेक्ट में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है हम देर से जाग रहे हैं, लेकिन दुरुस्त रास्ते पर हैं। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज को लेकर हम सभी को समाज में जागरूकता फैलाने की जरूरत है। अब विदेशी भी इसे सुपर फूड, हेल्दी फूड और फ्यूचर फूड कहने लगे हैं। श्रीधान्य हम भारतीयों का भोजन रहा है। पिछले करीब 100 वर्षों से हमने इसे खाना छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि हम बीमार होते जा रहे हैं।
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पूर्व राज्यसभा सांसद और विद्यालय निदेशक आरके सिन्हा ने कहा कि भारत सरकार श्रीधान्य के क्षेत्र में काम कर रही है। देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों में श्रीधान्य के क्षेत्र में काम किया जा रहा है। सरकार किसानों को प्रेरित कर रही है और अनुदान भी दे रही है। वरिष्ठ पत्रकार और इंदिरा गांधी कला केंद्र के अध्यक्ष पद्मश्री राम बहादुर राय ने कहा कि आज हम अपनी पारंपरिक चीजों को छोड़ चुके हैं। कहा कि सेहत की जगह स्वाद पर बल दिया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी किसान व स्थानीय लोगों को प्रमाणपत्र वितरित किया गया। इनमें चंद्रशेखर कुमार, रमेश चंद्र विश्वकर्मा, भगवान मिश्रा, राहुल वली, अनवर जैन, उदय सहाय, एके सिंह, बिशुंधर, ईलम चंद, संजय कुमार, राजीव, रंजीता आदि किसान और लोग शामिल रहे। इस मौके पर सेवानिवृत्त आईएएस और इंडियन पब्लिक स्कूल के कार्यपालक अध्यक्ष डीके कोटिया, वरिष्ठ पत्रकार राधा रमण आदि उपस्थित रहे।
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