उत्तराखंड की पांच सीटों पर बीजेपी में घमासान
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भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री बची सिंह रावत ने नैनीताल-ऊधमसिंहनगर लोकसभा सीट के टिकट पैनल में नाम न होने से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया।
इसके साथ ही भाजपा में लोकसभा सीटों के लेकर अन्य नेताओं में भी घमासान चल रहा है।
नैनीताल संसदीय सीट
बचदा के कठोर कदम उठाने के बाद अब इस सीट पर ज्यादा बवाल होने की उम्मीद बन रही है।
सूत्र बताते है कि भगतदा की राह रोकने के लिए बचदा, बलराज पासी का सपोर्ट कर सकते है। क्योंकि उनका मकसद भगतदा को रोकना है। और वह सही समय पर कोई फैसला लेंगे।
पौड़ी संसदीय सीट
पार्टी के भीतर दावा तो यही है कि इस सीट से पूर्व सीएम बीसी खंडू़ड़ी का नाम फाइनल है।
लेकिन मोहन सिंह रावत गांववासी की नाराजगी के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मनोहरकांत ध्यानी और प्रदेश प्रवक्ता अनिल बलूनी की नाराजगी भी जल्द प्रकट हो सकती है।
इस सीट को लेकर टिकट की जंग दिलचस्प होती जा रही है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र सिंह रावत की चुप्पी भी बोलने का काम कर रही है।
टिहरी संसदीय सीट
यहां पर सीटिंग एमपी माला राज्य लक्ष्मी शाह का नाम फाइनल बताया जा रहा है। लेकिन मुन्ना सिंह चौहान ने मुकाबले में आ गए है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि जनता की भावनाओं के अनुरूप ही फैसला हो। मुन्ना चौहान और महारानी में से भाजपा किस पर भरोसा करेगी इसे लेकर सीट का मिजाज काफी गर्म हो गया है।
अल्मोड़ा संसदीय सीट
हालात यहां पर भी खराब है। इस खांटी पर्वतीय संसदीय सीट पर तीन बार विधायक का चुनाव जीत चुके अजय टम्टा दावेदार तो है।
लेकिन केंद्रीय नेताओं की रणनीति ने भी आग में घी का काम किया है। कुछ केंद्रीय नेता रेखा आर्य के साथ खड़े हैं तो कुछ का सपोर्ट चनरराम को है। लेकिन अभी तय करना मुश्किल लगता है।
हरिद्वार संसदीय सीट
तीन बार विधायक का चुनाव जीत चुके कौशिक की राह पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक रोक रहे हैं। निशंक ने केंद्रीय नेतृत्व के सामने यही बात रखी कि बीसी खंडूड़ी व भगतदा चुनाव लड़ाया जाता है तो उनका भी दावा बनता है।
उधर, नरेश बंसल ने भी मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। बंसल के साथ एक बड़े केंद्रीय नेता खड़े है।