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थम नहीं रहा गैरसैंण विवाद, नेता उगल रहे आग

Fri, 06 Nov 2015 12:08 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 06 Nov 2015 12:08 PM IST
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dispute in uttarakhand assembly session at gairsain.

गैरसैंण में उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ता और गैरसैंण ब्लॉक प्रमुख सुमति बिष्ट से विपक्ष के विधायकों के अभद्रता के मामले ने तूल पकड़ लिया है।

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कांग्रेस ने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गैरसैंण भेजने का ऐलान किया है। कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को राज्यपाल से भी मिलेगा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का कहना है कि ब्लॉक प्रमुख से अभद्रता के साथ ही सदन में हुई तोड़फोड़ की घटना पर भी राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।
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उधर, भाजपा ने गैरसैंण चार्जशीट का मुद्दा उठाया और कहा कि प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने की मांग को लेकर केंद्र का दरवाजा खटखटाया जाएगा। भाजपा प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से भी मिलेगा। ब्लॉक प्रमुख से अभद्रता के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद बृहस्पतिवार को यह मामला और गरमा गया।
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आरोप है कि सत्र के दौरान गैरसैंण में विधानभवन के बाहर विरोध जता रही गैरसैंण ब्लॉक प्रमुख को भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल आदि ने अपशब्द कहे। इस मामले में कांग्रेस के कुछ लोगों की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज किया है।

बृहस्पतिवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष उपाध्याय ने कहा कि इस मामले में कांग्रेस ब्लॉक प्रमुख के साथ है। इस पूरे प्रकरण पर ब्लॉक प्रमुख का साथ देने के लिए कांग्रेस का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गैरसैंण जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस की पूर्व पालिका अध्यक्ष शांति जुवांठा, महेंद्र पाल, कांग्रेस महिला प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य आदि शामिल हैं।

किशोर के मुताबिक सदन में हुए हंगामे को लेकर भी कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को राज्यपाल से मिलेगा। राज्यपाल से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। उधर, नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने सरकार के खिलाफ जारी की गई गैरसैंण चार्जशीट का हवाला देते हुए कहा कि  राष्ट्रपति से भी मिला जाएगा और केंद्र सरकार का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।

भाजपा ने विधानसभा पीठ पर उठाए सवाल
गैरसैंण सत्र के दौरान तीन नवंबर को सदन में हुए बवाल की आंच अब विधानसभा पीठ तक पहुंच गई है। अपने विधायकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर भाजपा बृहस्पतिवार को और ज्यादा हमलावर हो गई है। गैरसैंण की घटना पर भाजपा नेताओं ने सीधे-सीधे विधानसभा अध्यक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है।

नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल को कांग्रेस कार्यकर्ता बताया और कहा कि सदन में विपक्ष के विधायकों को पीटने के लिए लोग बुला लिए गए थे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष कुछ नहीं बोल रहे हैं।

भाजपा मुख्यालय में मीडिया से मुखातिब नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में एक कांग्रेस कार्यकर्ता की तरह व्यवहार किया। आगे नियम बनने चाहिए कि कौन अध्यक्ष बने और कौन नहीं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने कहा कि भाजपा विधायकों ने सदन में घुस आए तत्वों का विरोध किया था।

हमारा दुख यह है कि विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर कोई फैसला नहीं दिया। नियम 310 के तहत सदन में चर्चा कराना विधानसभा अध्यक्ष का विशेषाधिकार था। विधानसभा अध्यक्ष खुद गैरसैंण में स्थायी राजधानी की पैरवी करते रहे हैं। सदन में विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष की इस मांग को अनसुना किया। सदन में सादी वर्दी में पुलिस घुस आई थी।

ऐसा कोई काम नहीं किया जो नियमों के खिलाफ हो : कुंजवाल
भाजपा के आरोपों पर विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि तीन नवंबर को गैरसैंण में सदन के अंदर जो कुछ हुआ वह निंदनीय है। विधानसभा अध्यक्ष होने के नाते सदन में मैने ऐसा कोई काम नहीं किया जो विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली के तहत न हो।

मैं जोर देकर स्पष्ट करना चाहता हूं कि सदन में न तो पुलिस घुसी और न ही कोई कांग्रेसी। जब विपक्ष के विधायकों की तोड़फोड़ हद से ज्यादा हो गई तो मार्शल ने विधानसभा सचिवालय के स्टाफ को बुला लिया। इस स्टाफ को भी मैने दरवाजे से ही वापस कर दिया था। कार्य संचालन नियमावली का नियम 310 कार्य स्थगन का प्रस्ताव है।

इसमें सरकार की विफलता पर चर्चा होती है। नियम 310 के तहत प्रस्ताव लाकर भाजपा ने पहले ही साफ कर दिया था कि उनकी मंशा गैरसैंण पर चर्चा करने की नहीं है। सरकार तो तैयार नहीं थी, मैने अपने अधिकार का उपयोग कर सदन में नियम 58 के तहत चर्चा स्वीकार की थी। इसमें भी तो सरकार का पक्ष आ जाता। जिस तरह से विपक्ष के विधायकों ने सदन में मेजें पलटीं, मार्शल से उलझे, कागजों के गोले फेंके वह निंदनीय है। ऐसे तो किसी को किसी पर विश्वास नहीं रहेगा।

विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल उस पीढ़ी के राजनेता है जो अब राजनीति में विरल हैं। वे सज्जन हैं, विनम्र हैं और संसदीय ज्ञान रखते हैं। उन पर ही आरोप लगाना सही नही है।
- किशोर उपाध्याय, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

जो हम चाहते हैं वैसा ही दिखाओ
गैरसैंण में तीन नवंबर को सदन में हुई तोड़ फोड़ का मामला अब विधानसभा फुटेज पर आकर भी टिक गया है। भाजपा भी इस फुटेज को जारी करने की मांग कर रही है। मुख्यमंत्री हरीश रावत का भी कहना है कि वे विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह करेंगे कि फुटेज जारी किया जाए। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि इस मामले में विचार करके तय किया जाएगा कि यह फुटेज जारी की जा सकती है या नहीं। इतना जरूर है कि विधानसभा जांच के लिए इस फुटेज का उपयोग तो कर ही सकती है।

तीन नवंबर को सदन में हुई तोड़ फोड़ की घटना के वीडियो फुटेज को लेकर भी अब सियासत है। भाजपा अपने दृष्टिकोण से इस वीडियो फुटेज को जारी करने की मांग कर रही है तो कांग्रेस अपने दृष्टिकोण से मामले को देख रही है। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट का कहना है कि घटना के वीडियो फुटेज जारी कर इस बात को तय किया जाए कि सदन में कौन लोग घुस आए थे। अजय भट्ट का आरोप है कि सदन में नेता सदन और मुख्यमंत्री हरीश रावत के इशारे पर पुलिस बुलाई गई।

मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि वे विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया जाएगा कि वीडियो फुटेज जारी किया जाए। मुख्यमंत्री के मुताबिक वीडिया फुटेज से जाहिर हो जाएगा कि सदन में एक भी कांग्रेसी नहीं घुसा। यह भी साफ हो जाएगा कि किस तरह से विधानसभा अध्यक्ष को निशाना बनाकर कागज की मिसाइल फेंकी गई।

उधर, विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि विधानसभा कार्य संचालन नियमावली को देखते हुए और विचार करने के बाद यह तय किया जाएगा कि फुटेज जारी की जा सकती हैं या नहीं।

मैं हाथ जोड़कर विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह करूंगा कि वीडियो फुटेज जारी करना चाहिए। कैग की रिपोर्ट को विधानसभा अध्यक्ष की ओर लक्ष्य करके फेंका गया क्या यह सही है।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री

विधान भवन की अधिसूचना को लेकर भी विवाद
बृहस्पतिवार को भाजपा ने इस सारे विवाद में एक और विवाद जोड़ दिया। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा कि गैरसैंण में विधानभवन परिसर की अलग से अधिसूचना जारी होनी चाहिए थी। इस अधिसूचना से यह साफ होता कि विधान मंडप यहां हैं, ये विधानसभा अध्यक्ष का कक्ष है और ये नेता प्रतिपक्ष का कक्ष है और ये सब विधान परिसर का हिस्सा हैं।

ऐसा न होने के कारण ही विधानसभा अध्यक्ष को कहना पड़ रहा है कि अस्थाई विधानसभा भवन होने के कारण कार्यवाही नहीं हो सकती। उधर, विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र की अधिसूचना राज्यपाल की सहमति के बाद जारी की गई थी। इसी में यह भी स्पष्ट है।

प्रसारण से खुद ही बचते रहे
सदन की कार्यवाही का प्रसारण अगर करने दिया गया होता तो शायद राजनीतिक दलों को घटना की अपनी-अपनी तरह से व्याख्या करने की जरूरत भी न पड़ती। हाल यह रहा कि गैरसैंण सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही का मोबाइल से ली गई क्लिप के सामने आने पर अगले दिन सुरक्षा कर्मियों ने प्रेस प्रतिनिधियों को बंद मोबाइल भी अंदर नहीं ले जाने दिए।


इससे पहले भी सदन की कार्यवाही के सीधे प्रसारण की मांग की जाती रही है। विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर हामी भी भरी थी। पर सत्र के दौरान सदन में भाजपा विधायकों के वैल में आने की क्लिप सामने आने पर कार्यवाही की चेतावनी तक दे दी गई।

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