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कुर्सी एक अफसर दो, बड़ी नाइंसाफी है...
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 06 Jan 2014 12:04 PM IST
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राजाजी राष्ट्रीय पार्क में उप वन संरक्षक (डीसीएफ) नीतिश मणि त्रिपाठी और उप निदेशक एचके सिंह के बीच अधिकारों को लेकर जंग की तैयारी है।
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एक दूसरे का दखल बर्दाश्त नहीं
शासन की ओर से उपनिदेशक एचके सिंह का तबादला कर दिया गया था, जिस पर हाईकोर्ट से स्थगन आदेश मिल गया है। ऐसे में अब दोनों ही अधिकारी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में एक दूसरे का दखल बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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कुछ दिन पहले ही शासन ने उप निदेशक एचके सिंह का वन पंचायत में उप निदेशक के पद पर स्थानांतरण कर दिया था। शासन के फैसले के खिलाफ एचके सिंह ने हाईकोर्ट से स्थगन आदेश हासिल कर लिया है।
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हालांकि, इस बीच शासन ने वित्तीय अधिकार उपनिदेशक से हटाकर उप वन संरक्षक नीतिश मणि त्रिपाठी को दे दिए। त्रिपाठी भारतीय वन सेवा के अधिकारी हैं। पहली बार ऐसा हो रहा है कि पार्क में उप वन संरक्षक के साथ उप निदेशक की भी तैनाती की गई हो।
स्थगन आदेश का हवाला
ऐसे में अन्य अधिकारों को लेकर दोनों अफसरों के बीच जंग हो सकती है। पार्क कार्यालय में एक ही कार्यालय है, जिसमें उपनिदेशक एचके सिंह स्थगन आदेश का हवाला देकर बैठ रहे हैं।
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उप वन संरक्षक नीतिश मणि त्रिपाठी को कहां बैठेंगे, यह तय नहीं हो पाया है। ऐसी स्थिति में पार्क के कर्मचारियों के लिए मुश्किल हो रहा है कि किसके आदेश का अनुपालन किया जाए।
राजाजी पार्क में उप वन संरक्षक और उप निदेशक के पद को लेकर उठे विवाद से कर्मचारियों के अलावा अधिकारियों के लिए भी मुश्किल खड़ी हो गई है। इसको लेकर शासन से मार्ग दर्शन लिया जाएगा। शासन की ओर से जो भी कहा जाएगा, उसी का अनुपालन किया जाएगा।
- एसएस शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक, वन्यजीव
भर्ती घोटाले की शुरू हुई जांच
राजाजी पार्क में फारेस्ट गार्ड की भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। नियमों को ताक पर रखकर नियुक्ति पत्र जारी किया गया है। इस धांधली की जांच करने के लिए प्रमुख वन संरक्षक डॉ. आरबीएस रावत ने मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव धनंजय मोहन को जिम्मेदारी सौंपी है।
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धनंजय मोहन की ओर से जांच शुरू कर दी गई है। यह भर्ती पार्क के उपनिदेशक एचके सिंह की ओर से की गई थी। इससे पहले धनंजय मोहन चीला रेंज में हुए चारा घोटाले की भी जांच कर चुके हैं, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। इस प्रकरण में डॉ. रावत ने प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव से रिपोर्ट पर आख्या मांगी है, जिससे पूरे मामले को शासन को भेजा जा सके।
पहली पोस्टिंग में ही विवाद
प्रांतीय वन सेवा के अधिकारी एचके सिंह को भाजपा के शासनकाल में निलंबित कर दिया गया था। टिहरी में बड़े पैमाने पर पेड़ कटान मामले में उन्हें दोषी पाया गया था। लंबे समय बाद उनका निलंबन निरस्त हुआ था।
निलंबन के बाद एचके सिंह की फील्ड में पहली पोस्टिंग 2012 के आखिर में राजाजी पार्क में की गई थी, लेकिन यहां पर विवाद ने उनका दामन नहीं छोड़ा। भर्ती करने से लेकर स्थानांतरण तक में विवाद सामने आ रहा है।