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प्रत्याशियों की सूची से फूटेगी कांग्रेस और भाजपा में बगावत की चिंगारी

Mon, 09 Jan 2017 10:39 AM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 09 Jan 2017 10:39 AM IST
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dispute between BJP and Congress candidates after list releasing
bjp - फोटो : bjp

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों का चयन होने के बाद उठने वाले बागी सुर भाजपा और कांग्रेस की चिंता बढ़ा रहे हैं। दोनों ही दलों में प्रत्याशी सूची की कवायद अब केंद्रीय लीडरशिप से मुहर का इंतजार कर रही है।

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कांग्रेस के लिए बड़ी चिंता पीडीएफ गठबंधन पर अभी तक बना संशय दिख रहा है तो भाजपा के लिए कांग्रेस से शामिल हुए दर्जन भर नेता हैं। टिकट आवंटन में बाहरियों का चयन संबंधित विधानसभाओं में पुराने कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष बढ़ा सकता है।
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फिलहाल दोनों ही दलों ने मकर संक्रांति के बाद ही पहली सूची जारी करने की डेडलाइन तय की है, लेकिन घमासान अभी से मचने लगा है। विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने से असंतुष्टों का चुनाव में उतरना नई बात नहीं है, लेकिन अगर 2012 के विधानसभा चुनाव से तुलना की जाए तो इस बार राजनीतिक दलों के लिए स्थिति और मुश्किल होने वाली है।
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पिछले चुनाव में लगभग एक दर्जन विधानसभा सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को प्रत्याशी चयन के बाद उठे बागी सुरों से नुकसान झेलना पड़ा। कांग्रेस को पिछले चुनाव में विधानसभा धनौल्टी, यमकेश्वर, बीएचईएल रानीपुर, सहसपुर, मसूरी में बागियों के चलते हार मिली थी। जबकि भाजपा को कर्णप्रयाग और बदरीनाथ सीट में नुकसान हुआ।

भाजपा के खाते में दर्जन भर बागी

dispute between BJP and Congress candidates after list releasing
भाजपा कार्यालय में पहुंचे बागी - फोटो : AmarUjala

विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज बागियों ने किसी भी दल को बहुमत का आंकड़ा नहीं छूने दिया। वहीं इस बार अकेले भाजपा के खाते में दर्जन भर बागी हैं। उधर, कांग्रेस के लिए भाजपा के बागियों के साथ पीडीएफ भी दिक्कतें बढ़ाती दिख रही है। हालांकि अभी तक दोनों राष्ट्रीय दलों की टिकट आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, लेकिन बगावत के तेवर अभी से दिखने शुरू हो गए हैं। अब दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने मंथन शुरू कर दिया है, जिससे कम से कम नुकसान अंतिम नतीजों पर पड़े।

कांग्रेस के लिए चिंता
मुख्यमंत्री हरीश रावत 63 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की सूची फाइल होने की बात कर रहे हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय 51 सीटों की बात कर रहे हैं। कांग्रेस में पीडीएफ गठबंधन पर स्थिति साफ नहीं हो रही। गठबंधन के निर्दलीय विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी, दिनेश धनै, हरीश चंद्र दुर्गापाल और उक्रांद विधायक प्रीतम सिंह पर अंतिम सहमति नहीं बनी है। गठबंधन की सियासत के चलते ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट तक के चुनावी क्षेत्रों पर स्थिति अस्पष्ट बनी हैं।

बागियों को सहेजने की चुनौती भाजपा को
भाजपा में प्रत्याशियों की सूची फाइल करने में कांग्रेस से शामिल हुए दर्जन भर नेता हैं। सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल, कुंवर प्रणव और उमेश शर्मा पर ज्यादा विरोध नहीं है, लेकिन पूर्व विधायक हरक सिंह, अमृता रावत, शैला रानी रावत, प्रदीप बत्रा और सुबोध उनियाल को लेकर विरोध के सुर लगातार उठ रहे हैं।

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