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उत्तराखंड में आपदा के बाद शुरू हुई प्रबंधन की तैयारी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 03 Jul 2016 08:14 PM IST
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disaster in uttarakhand
- फोटो : अमरउजाला
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उत्तराखंड में अतिवृष्टि की संभावनाओं को देखते हुए एहतियातन सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश पर अगले तीन माह तक रोक लगा दी गई है।
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यही नहीं पूर्व में स्वीकृत छुट्टियां भी निरस्त कर दी गई हैं। यह निर्देश रविवार को सचिवालय में शासन के वरिष्ठ अफसरों और सभी जिलाधिकारियों को दिए। इस दौरान वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अतिवृष्टि और भूस्खलन के कारण हुए जानमाल की हानि के साथ ही बचाव और राहत कार्यों की समीक्षा भी की गई।
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मुख्यमंत्री ने आपदा में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार के लिए पीड़ित परिवारों को 10-10 हजार रुपये देने को कहा। इसके अतिरिक्त प्रभावित परिवारों को 15 से 30 दिन तक का राशन दिया जाएगा। साथ ही होमगार्ड और पीआरडी के दो-दो सौ जवानों की तैनाती भी इन जिलों में की जाएगी।
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मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित पिथौरागढ़ और चमोली को पांच-पांच करोड़ रुपये, अन्य पर्वतीय जिलों को तीन-तीन करोड़ रुपये और मैदानी जिलों को एक-एक करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि देने को कहा है। यह राशि जिलों को पहले से स्वीकृत राशि के अलावा होगी, जो इमरजेंसी में आवश्यकता पड़ने पर इस्तेमाल की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने फसलों, कृषि भूमि और मवेशियों के नुकसान की साप्ताहिक रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए। कहा कि एसडीआरएफ में 100 पैरामेडिक भी नियुक्त किए जाएं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल राहत पहुंचाने में मदद मिलेगी। ग्राम प्रहरी आपदा सहायक के तौर पर उपयोग किए जाएं। संवेदनशील क्षेत्रों में एक-एक व्यक्ति को चिन्हित कर ग्राम प्रहरी और आपदा सहायक के तौर पर तैनात किया जाए, जिससे सूचनाएं जल्दी मिल सके।
मलबे में दबने या नदियों में मवेशियों के बहने से पेयजल प्रदूषित होने की स्थिति में पानी का ट्रीटमेंट किया जाए। बिजली विभाग एसडीओ स्तर तक मोबाइल जेनरेटर की व्यवस्था रखे। लोक निर्माण विभाग हर जिले में 4-5 रोबोट जेसीबी उपलब्ध रखे। वैली ब्रिज भी पर्याप्त संख्या में रखें और इससे जिलाधिकारियों को भी अवगत कराएं। जिलों में तैनात अधिकारियों को आकस्मिक अवकाश स्वीकृत करने का अधिकार जिलाधिकारियों को देने का निर्देश दिया है।
साथ ही जिलों से अधिकारियों के स्थानांतरण में डीएम की एनओसी जरूरी की जाए। कैलाश मानसरोवर यात्रियों को पुलिस सुरक्षा दी जाए। मुख्यमंत्री ने डीएम या सीडीओ में कम से कम किसी एक को अनिवार्य रूप से जिला मुख्यालय में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। बैठक में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, अपर मुख्य सचिव डा. रणवीर सिंह, प्रमुख सचिव ओमप्रकाश, डा. उमाकांत पंवार, सचिव आनंदवर्द्धन, डीएस गर्ब्याल, अरविंद सिंह ह्यांकि, दिलीप जावलकर, पुलिस महानिदेशक एमए गणपति, अपर महानिदेशक अशोक कुमार, आईजी संजय गुंज्याल आदि अधिकारी मौजूद रहे।
राष्ट्रपति भी हुए व्यथित
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उत्तराखंड में अतिवृष्टि और बादल फटने के कारण आई आपदा में जानमाल के नुकसान पर गहरा दुख जताया है। इस संदर्भ में राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पाल को लिखे पत्र में राष्ट्रपति ने कहा कि विगत दिनों भारी वर्षा एवं बादल फटने की वजह से कई लोगों की मृत्यु की खबर से वे व्यथित हैं।
पत्र में राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आपदा प्रभावित परिवारों के साथ उनकी पूरी संवेदना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि राज्य सरकार और अन्य संबंधित एजेंसियां आपदा प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और घायलों के उपचार के लिए हरसंभव कदम उठा रही होंगी। राष्ट्रपति ने प्राकृतिक आपदा में मृतकों की आत्मा की शांति और आपदा में घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
Published By : Nirmala Suyal