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Dehradun News: दो साल से जाखन के आपदा प्रभावितों को विस्थापन का इंतजार
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मद्रसू ग्राम पंचायत के जाखन में प्राकृतिक आपदा के कारण बेघर हुए परिवारों का दो साल बाद भी विस्थापन नहीं हो पाया है। प्रशासन ने प्रभावितों को ग्राम पंचायत रुद्रपुर के खाली पड़े एक मैदान में बसाने की तैयारी शुरू की थी, लेकिन वहां के ग्रामीणों ने उच्च न्यायालय के स्टे आर्डर से रोक दिया था। तब से अब तक यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।
अगस्त 2023 में जाखन में प्राकृतिक आपदा के कारण घर-मकान, सड़कें व कृषि भूमि को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। इसके बाद भू-वैज्ञानिकों की टीम ने क्षेत्र को भूस्खलन जोन घोषित करते हुए यहां निवास करने वाले 19 परिवारों का विस्थापन किसी दूसरे स्थान पर किए जाने की रिपोर्ट सौंपी थी। प्रशासन ने बिना देरी किए प्रभावित परिवारों को रुद्रपुर ग्राम पंचायत के एक खाली पड़े मैदान में बसाने की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन, ग्राम पंचायत के पदाधिकारियों व स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए उच्च न्यायालय की शरण ली थी। उनका कहना था कि प्रभावित 19 परिवारों में से कई परिवारों के घर-मकान व कृषि भूमि पहले से ही दूसरे स्थानों पर स्थित हैं। इसके अलावा जिस मैदान को विस्थापन के लिए चिह्नित किया गया है, वह खेलकूद व शादी-विवाह आदि संपन्न कराने में काम आता है। ग्रामीणों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने प्रशासन की तैयारी पर रोक लगा दी थी।
प्रभावित गांव के प्रशासक अमित तोमर, उप प्रधान पिंकी देवी का कहना है कि हाईकोर्ट में प्रशासन को मामले की पैरवी करनी है। हम अभी प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रुद्रपुर में विस्थापन होना उनके लिए अधिक सुविधाजनक है।
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एसडीएम विकासनगर विनोद कुमार ने बताया कि इस मामले में हाईकोर्ट में 25 जून को सुनवाई होनी है। सुनवाई व कोर्ट के दिशा-निर्देशन में आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
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अगस्त 2023 में जाखन में प्राकृतिक आपदा के कारण घर-मकान, सड़कें व कृषि भूमि को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। इसके बाद भू-वैज्ञानिकों की टीम ने क्षेत्र को भूस्खलन जोन घोषित करते हुए यहां निवास करने वाले 19 परिवारों का विस्थापन किसी दूसरे स्थान पर किए जाने की रिपोर्ट सौंपी थी। प्रशासन ने बिना देरी किए प्रभावित परिवारों को रुद्रपुर ग्राम पंचायत के एक खाली पड़े मैदान में बसाने की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन, ग्राम पंचायत के पदाधिकारियों व स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए उच्च न्यायालय की शरण ली थी। उनका कहना था कि प्रभावित 19 परिवारों में से कई परिवारों के घर-मकान व कृषि भूमि पहले से ही दूसरे स्थानों पर स्थित हैं। इसके अलावा जिस मैदान को विस्थापन के लिए चिह्नित किया गया है, वह खेलकूद व शादी-विवाह आदि संपन्न कराने में काम आता है। ग्रामीणों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने प्रशासन की तैयारी पर रोक लगा दी थी।
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प्रभावित गांव के प्रशासक अमित तोमर, उप प्रधान पिंकी देवी का कहना है कि हाईकोर्ट में प्रशासन को मामले की पैरवी करनी है। हम अभी प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रुद्रपुर में विस्थापन होना उनके लिए अधिक सुविधाजनक है।
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एसडीएम विकासनगर विनोद कुमार ने बताया कि इस मामले में हाईकोर्ट में 25 जून को सुनवाई होनी है। सुनवाई व कोर्ट के दिशा-निर्देशन में आगे की रणनीति बनाई जाएगी।