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घोषणाओं के बोझ तले दबे रह गए बच्चे
देहरादून/बिशन सिंह बोरा
Updated Fri, 09 Aug 2013 08:07 PM IST
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उत्तराखंड सरकार आपदा प्रभावितों की मदद करने के लिए कितनी गंभीर है, यह किसी से नहीं छिपा हुआ। सरकार के सुस्त रवैये से अब प्रभावित जरूर खीझने लगे हैं।
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इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार घोषणाएं तो करती जा रही है, लेकिन उसे अमलीजामा पहनाने के लिए अपने अधिकारियों पर दबाव बनाने में नाकाम साबित हो रही है।
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नहीं हो पाई प्रभावित बच्चों की पहचान
प्रदेश में आई आपदा के डेढ़ महीने बाद प्रभावित बच्चों की पहचान नहीं हो पाई है। रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ और उत्तरकाशी में इस तरह के बच्चों की पहचान का काम अब शुरू हुआ है।
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लापरवाही का आलम यह है कि आपदाग्रस्त क्षेत्रों में प्रभावित प्रमाणपत्र का फार्म तक उपलब्ध नहीं है। राजस्व विभाग की ओर से जारी यह फार्म दुकानों पर बेचा जा रहा है।
सरकार की ओर से आपदा प्रभावित बच्चों के लिए आवास सुविधा से लेकर खाने पीने और शिक्षा की पूर्ण व्यवस्था की घोषणा की गई थी। सचिव विद्यालयी शिक्षा मनीषा पंवार की अध्यक्षता में 16 जुलाई को हुई बैठक में प्रभावित बच्चों का विवरण तैयार करने का निर्णय लिया गया था।
नहीं पहुंचा फार्मेट
इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान की ओर से फार्मेट तैयार कर स्कूलों को दिया जाना था। लेकिन, यह फार्मेट केवल रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ ब्लॉक तक ही पहुंच पाया है।
अधिकारियों का कहना है कि पिथौरागढ़ एवं अन्य प्रभावित जनपदों में भी फार्मेट का वितरण जल्द किया जाएगा। वहीं, राजस्व विभाग की ओर से मिलने वाले प्रभावित प्रमाण पत्र भी बच्चों को उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
लंबी प्रक्रिया पड रही भारी
आपदा प्रभावित ग्रामीण बताते हैं कि यह फार्म दुकानों पर 15 रुपये में बिक रहा है। फार्म खरीदने के बाद प्रमाणपत्र के लिए बच्चों को तहसील के कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पूर्व प्रधान और ऊखीमठ निवासी माधव कर्नाटक बताते हैं कि बच्चों को इस प्रमाण पत्र के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।