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Uttarakhand: संस्कृत में बात करेंगे इस गांव के लोग, प्रदेश के 13 और गांवों में भी तैयारी, जानिए इसके पीछे वजह

Wed, 05 Apr 2023 11:33 AM IST
रेनू सकलानी प्रमोद सेमवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर
प्रमोद सेमवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 05 Apr 2023 11:33 AM IST
सार

कर्णप्रयाग से 7 किलोमीटर की दूरी पर डिम्मर गांव स्थित है। 500 परिवारों के इस गांव में लगभग 250 ब्राह्मण, 150 राजपूत और 100 अनुसूचित जाति के परिवार रहते हैं। डिम्मर गांव के डिमरी ब्राह्मण बदरीनाथ धाम में पूजा-अर्चना का जिम्मा संभालते हैं। साथ ही वह माता मूर्ति से लेकर जोशीमठ नृसिंह मंदिर में भी पूजा का दायित्व संभालते हैं।

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Dimmer villagers will now talk in Sanskrit Directorate selected 13 ideal Sanskrit villages chamoli Uttarakhand
जोशीमठ गांव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश सरकार की मुहिम रंग लाई तो अब डिम्मर गांव की महिलाएं अहम खेत्रम गच्छामी, तत्र घासम गृहणामी..(मैं खेत जा रही हूं, वहां से घास लेकर घर आऊंगी) इसी तरह संस्कृत भाषा में आपस में बातें करेंगी। प्रदेश के संस्कृत निदेशालय ने राज्य के 13 जिलों में 13 आदर्श संस्कृत ग्राम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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इसके तहत चमोली जिले के डिम्मर गांव को आदर्श संस्कृत ग्राम के रूप में चयनित किया गया है। गांव में महिलाओं से लेकर बच्चों और बुजुर्गों को संस्कृत भाषा सिखाई जाएगी। इसके लिए गांव में एक संस्कृत प्रशिक्षित व्यक्ति का चयन किया जाएगा जो ग्रामीणों को संस्कृत भाषा बोलनी सिखाई जाएगी। इसके लिए उसे 12000 रुपये प्रतिमाह मानदेय भी दिया जाएगा।
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कर्णप्रयाग-सिमली मोटर मार्ग पर कर्णप्रयाग से 7 किलोमीटर की दूरी पर डिम्मर गांव स्थित है। 500 परिवारों के इस गांव में लगभग 250 ब्राह्मण, 150 राजपूत और 100 अनुसूचित जाति के परिवार रहते हैं। डिम्मर गांव के डिमरी ब्राह्मण बदरीनाथ धाम में पूजा-अर्चना का जिम्मा संभालते हैं। साथ ही वह माता मूर्ति से लेकर जोशीमठ नृसिंह मंदिर में भी पूजा का दायित्व संभालते हैं।

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संस्कृत शिक्षा विभाग करेगा माॅनिटरिंग
बदरीनाथ धाम के गाडू घड़ा का संचालन भी डिम्मर गांव से होता है। यही नहीं बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा संपन्न होने के बाद बदरीनाथ के रावल भी डिम्मर गांव के लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा के लिए पहुंचते हैं। इन सब धार्मिक कार्यक्रमों में अधिकाधिक संस्कृत का प्रयोग होता है। इसलिए इस योजना के तहत डिम्मर गांव का चयन किया गया है। इसके तहत अब गांव के सभी वर्गों के लोगों को संस्कृत भाषा बोलना सिखाया जाएगा। साथ ही गांव में संस्कृत ग्राम शिक्षा समिति का गठन भी किया जाएगा। समिति की ओर से प्रतिमाह संस्कृत भाषा पर चर्चा की जाएगी। इसकी माॅनिटरिंग संस्कृत शिक्षा विभाग करेगा।

वर्ष 1918 से हो रहा डिम्मर गांव में संस्कृत महाविद्यालय का संचालन

डिम्मर गांव में वर्ष 1918 से संस्कृत महाविद्यालय का संचालन हो रहा है। पूर्व में डिमरी ब्राह्मणों की ओर से ही महाविद्यालय का संचालन किया जाता था। मौजूदा समय में महाविद्यालय को श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से संचालित किया जाता है। यहां कक्षा छह से आचार्य तक की कक्षाओं का संचालन होता है। डिमरी परिवारों ने महाविद्यालय के संचालन के लिए अपनी 30 नाली भूमि भी दान में दी थी और यहां एक छात्रावास भी है।

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आदर्श संस्कृत ग्राम बनाना सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। इसके तहत डिम्मर गांव के सभी वर्गों के लोगों को संस्कृत भाषा बोलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ग्रामीणों को सरल रूप में संस्कृत सिखाई जाएगी। संस्कृत देश की द्वितीय राजभाषा है। इसके प्रचार-प्रसार के लिए सभी को आगे आने की आवश्यकता है। - डाॅ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल, सहायक निदेशक, शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा, देहरादून।

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