डिजिटल इंडिया: अपने मन की कह गए PM, लोगों की नहीं सुनी
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डिजिटल इंडिया सप्ताह के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने मन की बात कहने आए हरिद्वार जिले के दो गांवों के ग्रामीणों के हाथ निराशा ही लगी।
प्रधानमंत्री ने करीब 38 मिनट के संबोधन में अपने मन की बात तो कही लेकिन ग्रामीणों से मुखातिब नहीं हुए। फेरूपुर में पहले आधे घंटे इंटरनेट कनेक्टिविटी ने परेशान किया और बाकी कार्यक्रम के दौरान बिजली गुल रही। बाजूहेड़ी में लोगों के बैठने के लिए जगह कम पड़ गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हरिद्वार जिले के फेरूपुर और बाजूहेड़ी के ग्रामीणों से मुखातिब होना था। ग्रामीणों को ऐसा बताया गया था। इसके लिए प्रशासन की ओर से दोनों गांवों के पंचायत भवनों में तैयारियां की गई थीं।
स्पीड का दावा हुआ फेल, कई बार कटी कनेक्टिविटी
डिजिटल इंडिया से जुड़े गांवों में 100 एमबीपीएस स्पीड का दावा किया गया था पर इसकी हकीकत प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान सामने आ गई।
कार्यक्रम शाम चार बजे शुरू होना था। फेरूपुर में 3.56 बजे कनेक्टिविटी चली गई। इसके बाद 4.08 मिनट पर दिल्ली से फिर संपर्क हुआ लेकिन आवाज कट-कट कर और दृश्य रुक-रुककर आते रहे। 4.14 बजे कनेक्टिविटी ठप हो गई। 4.21 बजे लिंक जुड़ा लेकिन आवाज कटती रही। 4.25 बजे फिर से कनेक्टिविटी धोखा दे गई।
पांच मिनट बाद फिर से कनेक्शन जुड़ा। इसके बाद कार्यक्रम के अंत तक प्रसारण सही रहा लेकिन इसी बीच 4.27 मिनट पर बिजली चली गई जो शाम 6.10 बजे कार्यक्रम खत्म होने तक भी नहीं आई थी।
हालांकि प्रशासन की ओर से जनरेटर की व्यवस्था की गई थी। बाजूहेड़ी गांव में पंचायत भवन में जगह कम पड़ने से लोगों के बैठने में दिक्कत हुई। यहां पर लोग व्यवस्थाओं को कोसते रहे।
बोले ग्रामीण, भाषण ही सुनना था तो घर पर सुन लेते
दोनों जगहों पर लोगों को प्रधानमंत्री से सीधे मुखातिब होने का क्रेज गर्मी में भी दो घंटे से ज्यादा रोके रहा लेकिन जब प्रधानमंत्री अपना भाषण समाप्त कर चले गए तो लोगों में निराशा दिखी। लोगों का कहना था कि टीवी पर भाषण ही सुनना था तो अपने घर बैठकर भी सुन सकते थे। यहां मजमा लगाने की क्या जरूरत थी।
शिकायतें लेकर पहुंचे ग्रामीण
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत लोगों में क्रेज तो प्रधानमंत्री बातें सुनने और उन्हें अपनी बात सुनाने का था लेकिन जब प्रशासन घर पर आया तो लोग इस मौके को हाथ से जाने भी कैसे देते। बड़ी संख्या में ग्रामीण शिकायतों का अंबार लेकर अधिकारियों से मिले।
कोई खेत की नपाई कराने की मांग को लेकर पहुंचा तो किसी ने जन्म प्रमाण पत्र और किसी ने जाति प्रमाण पत्र की अर्जी थमा दी। गांव के पास बन रहे एक धर्म स्थल का मुद्दा भी अधिकारियों के सामने उठाया गया। हालांकि कई बार अधिकारी यह भी कहते दिखाई दिए कि भाई यह जनता दरबार नहीं है। समस्याएं फिर कभी बता देना लेकिन देर तक लोगों ने समस्याएं बताने का सिलसिला जारी रखा।