{"_id":"5b3e3c784f1c1b84468b4c54","slug":"dhumakot-bus-accident-question-on-action-public-works-department","type":"story","status":"publish","title_hn":"धुमाकोट बस हादसे में लोनिवि की कार्रवाई पर उठे सवाल, सुबह प्रशंसा पत्र, शाम को निलंबन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धुमाकोट बस हादसे में लोनिवि की कार्रवाई पर उठे सवाल, सुबह प्रशंसा पत्र, शाम को निलंबन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 05 Jul 2018 09:12 PM IST
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धुमाकोट बस दुर्घटना में निलंबित इंजीनियरों को विभाग की ओर से सुबह विशिष्ट कार्यों के लिए प्रशंसा पत्र दिया गया और उसी शाम उन्हें निलंबन आदेश थमा दिए गए। ऐसे में अब विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। प्रकरण में एक तथ्य यह भी सामने आया है कि जिन सहायक अभियंता रवि शंकर यादव पर निलंबन की तलवार भांजी गई है, उनके पास बैजरो निर्माण खंड का अतिरिक्त प्रभार था। उनकी मूल तैनाती राजमार्ग खंड धुमाकोट में थी।
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बस दुर्घटना से एक हफ्ते पहले 26 जून को प्रमुख अभियंता कार्यालय ने वर्ष 2017-18 में महत्वपूर्ण और विशिष्ट कार्यों को कठिन परिश्रम, लगन और दक्षता से करने के लिए 75 से अधिक इंजीनियरों व मिनिस्ट्रीयल स्टॉफ के अफसरों और कार्मिकों को प्रशंसा प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए थे। इस सूची में 23 वें क्रमांक पर सहायक अभियंता रविशंकर यादव और 60 वें क्रमांक पर कनिष्ठ अभियंता प्रदीप खनसीली का नाम है।
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बताया जा रहा है कि दोनों इंजीनियरों को प्रशंसा पत्र जारी करने की यह चिट्ठी तीन जुलाई की सुबह दी गई और उसी दिन शाम को शासन स्तर से उनके निलंबन का आदेश जारी हो गए। निलंबित इंजीनियरों के बचाव में उतरे उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ का आरोप है कि स्थलीय जांच रिपोर्ट में दुर्घटना की वजह सड़क नहीं बताई गई थी। संघ की मानें तो इंजीनियरों को बलि का बकरा बना दिया गया।
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48 जानें लील गया ब्लैक स्पॉट, नहीं हुए सुरक्षा उपाय
धुमाकोट का भौन-पीपली मार्ग भीषण बस दुर्घटना में 48 जानें लील गया। इस मार्ग को परिवहन विभाग, लोनिवि, राष्ट्रीय राजमार्ग व पुलिस विभाग की संयुक्त टीम पांच मार्च 2018 को सर्वेक्षण में ब्लैक स्पॉट के तौर पर चिंह्ति कर चुकी है। टीम ने इस मार्ग को अत्यंत न्यून और संवेदनशील माना था। तीव्र ढालदार होने की वजह से खाई की ओर मार्ग में सुरक्षा दीवार, क्रैश बैरियर का निर्माण करने और मार्ग की चौड़ाई के लिए पहाड़ की कटिंग करने की संस्तुति की थी। लेकिन कोई काम नहीं किया गया।
बैजरों में 12 जेई चाहिए, सात ही तैनात
लोनिवि के बैजरो निर्माण खंड के बारे में एक तथ्य यह भी सामने आया है कि यहां जूनियर इंजीनियरों के 12 पद स्वीकृत हैं, लेकिन तैनाती सिर्फ सात की है। सहायक अभियंता का पद भी खाली है, जिसका अतिरिक्त प्रभार धुमाकोट में तैनात रवि शंकर यादव देख रहे थे।
टिहरी में चार की जरूरत, तैनात कर दिए 14 जेई
लोनिवि में तबादलों और पोस्टिंग का किस कदर खेल हो रहा है, इसकी सबसे ताजा बानगी टिहरी निर्माण खंड है। इस निर्माण खंड में जेई के चार पद ही स्वीकृत हैं। लेकिन यहां 14 कनिष्ठ अभियंता तैनात कर दिए गए। प्रभारी मुख्य अभियंता गोकर्ण सिंह पांगती ने प्रमुख अभियंता को 28 जून को बाकायदा पत्र लिखकर निवेदन किया कि सात कनिष्ठ अभियंताओं को जहां आवश्यकता हो वहां स्थानांतरित या समायोजित कर दें, लेकिन विभाग रसूखदारों के चहेते इंजीनियरों को हिलाने का साहस नहीं कर पा रहा है।
दोनों इंजीनियरों को बलि का बकरा बनाया गया। मार्गों की देखरेख के लिए गैंग तक कार्यरत नहीं है और न ही मरम्मतीकरण कार्य के लिए बजट उपलब्ध कराया गया है। सरकार निलंबन वापस ले। इस कार्रवाई से इंजीनियरों के मनोबल को चोट पहुंची है।
एसएस चौहान, प्रांतीय महामंत्री (लोनिवि)
इंजीनियरों को प्रशंसा पत्र देना और सड़क की देखरेख में लापरवाही दोनों अलग-अलग मसले हैं। यह जरूरी नहीं कि प्रशंसा पत्र लेने वाला इंजीनियर लापरवाही नहीं कर सकता है।
- आरसी पुरोहित, प्रमुख अभियंता, लोनिव