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कृषि विभाग को सालों बाद याद आई गलती
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 27 Oct 2014 10:34 AM IST
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उत्तराखंड कृषि विभाग को 170 कर्मचारियों को गलत चार्जशीट देने की याद चार साल बाद आई है। ढेंचा बीज घोटाले के मामले में विभाग की इस लापरवाही से जांच मजाक बनकर रह गई है।
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170 कर्मचारियों को दी गई थी चार्जशीट
अब संबंधित कर्मचारियों को नए सिरे से चार्जशीट देने की कवायद शुरू करने की बात कही जा रही है। लेकिन इसमें लगने वाले वक्त से मामला लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है। कृषि विभाग में पांच करोड़ के बीज घपले में वर्ष 2010-11 में चार मुख्य कृषि अधिकारियों और विभिन्न जनपदों के 170 कर्मचारियों को चार्जशीट दी गई थी।
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वर्ष 2005 की नियमावली में व्यवस्था थी कि जांच अधिकारी कर्मचारियों को आरोपपत्र दे सकता था। वर्ष 2010 में नए जीओ के बाद दंडाधिकारी या फिर नियुक्ति अधिकारी ही चार्जशीट दे सकता है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने इसकी अनदेखी कर खुद ही चार्जशीट जारी कर दी।
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इनमें से कुछ आरोपपत्र जांच अधिकारी संयुक्त निदेशक केसी पाठक और संयुक्त निदेशक डा. परमाराम ने जारी किए थे। अब चार साल बाद विभाग को पता चला कि मामला कोर्ट में पहुंचेगा तो विभाग को परेशानी उठानी पड़ सकती है। इसके बाद पुरानी चार्जशीट निरस्त कर कृषि निदेशक चंद्र सिंह मेहरा की ओर से इन कर्मचारियों को नए आरोपपत्र दिए जा रहे हैं।
कर्मचारियों को यह हुआ नुकसान
गलत आरोपपत्र मिलने से कर्मचारियों को प्रमोशन नहीं मिल पा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि आरोप पत्र नये सिरे से दिए जा रहे हैं, तो इस बीच जिन कर्मचारियों के प्रमोशन होने थे, उन्हें पदोन्नत किया जाए।
उनके मुताबिक अब आरोपपत्र देने की कार्रवाई में कई साल लगेंगे, इस बीच कई कर्मचारी रिटायर हो जाएंगे लेकिन उन्हें पेंशन लाभ नहीं मिल पाएगा।
यह था मामला
वर्ष 2003-04 में करोड़ों का ढेंचा बीज फर्जी फर्मों के जरिये खरीदा गया था। कुछ जिलों में बीज आए बगैर ही किसानों को इसका वितरण दर्शाया गया। यह भी आरोप है कि अधिकारियों को बचाते हुए प्रकरण में कर्मचारियों को लपेटा गया।
नए शासनादेश के अनुसार जांच अधिकारी चार्जशीट नहीं दे सकता। इसके बावजूद जांच अधिकारियों ने अपने स्तर से चार्जशीट दे दी थी। मामला कोर्ट में न लटके ऐसे में अब नये सिरे से इन कर्मचारियों को आरोप पत्र दिए जा रहे हैं।
- चंद्र सिंह मेहरा, कृषि निदेशक