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DGP के आगे नहीं टिका CM का आदेश
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 02 Jun 2014 12:11 PM IST
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उत्तराखंड में बड़े हाकिमों पर सरकार की नजर टेढ़ी नहीं होती। पहले तो ऐसे कई मामले हैं लेकिन ताजा मामला डीजीपी बीएस सिद्धू से जुड़ा हुआ है।
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अभी तक कोई कार्रवाई शुरु नहीं
डीजीपी के खिलाफ शिकायत करने वाले दरोगा निर्विकार को तो पंद्रह दिन पहले ही सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन शिकायतों का जो पुलिंदा दरोगा ने शासन में दिया था उस पर अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई।
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यह तो तब हुआ जब मुख्यमंत्री सार्वजनिक तौर पर कह चुके थे कि डीजीपी पर लगाए गए आरोपों की भी जांच होगी। लेकिन अभी तक कोई शुरूआत नहीं होने से सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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दरोगा छोटा अफसर था तो नप गया, लेकिन सरकार ने उसके द्वारा महकमे के मुखिया बीएस सिद्धू पर लगाए गए गंभीर आरोपों का भी संज्ञान नहीं लिया।
जांच की बात कहकर भूले सीएम
दरोगा को सस्पेंड करने के साथ ही सीएम ने डीजीपी पर लगाए गए आरोपों की जांच की बात भी कही थी। लेकिन सरकार की तरफ से कोई शुरूआत नहीं होना यह दर्शाता है कि यहां बड़े अफसरों के खिलाफ कुछ नहीं होना है।
वर्ना, ऐसा कौन सा कारण है कि अभी तक जांच पड़ताल की कार्यवाही शुरू नहीं हुई।
दरोगा के निलंबन को लेकर पुलिस महकमे में निचले स्तर पर फोर्स में रोष है, लेकिन अनुशासन की दुहाई के चलते कोई बोलने को तैयार नहीं है।
उधर, आप पार्टी के नेता भी कई बार मिलकर राज्यपाल व सरकार को ज्ञापन सौंप चुकेहैं कि डीजीपी केखिलाफ कार्रवाई हो लेकिन सरकार ने कान नहीं दिया।
दरोगा को सस्पेंड करने और डीजीपी के मुद्दे पर चुप रहने से सरकार की नीयत पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शासन को तीन जुलाई का इंतजार
विगत 28 मई को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में डीजीपी बीएस सिद्धू से जुड़े पेड़ काटने वाले मामले की सुनवाई थी, लेकिन डीजीपी के वकील के अस्वस्थ होने के कारण यह सुनवाई अब तीन जुलाई को होगी।
माना तो यह जा रहा था कि इस बार फैसला हो जाएगा, लेकिन अब शासन समेत सभी पक्षों की नजर आगामी तीन जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी है।