चारधाम यात्रा 2020: गंगोत्री धाम में श्रद्धालुओं को मंदिर में जाने से रोका तो दर्ज होगी एफआईआर
- देवस्थानम बोर्ड की ओर से जिला प्रशासन को दिए गए कार्रवाई करने के निर्देश
- कानून व्यवस्था बिगाड़ने, श्रद्धालुओं से बदसलूकी करने पर एक्ट में है सजा की व्यवस्था
- किसी को भी मंदिर में श्रद्धालुओं को जाने से रोकने का अधिकार नहीं : रविनाथ रमन
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गंगोत्री मंदिर में श्रद्धालुओं को दर्शन करने से रोकने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड ने जिला प्रशासन को इस संबंध में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
बोर्ड के एक्ट में भी काननू व्यवस्था बिगाड़ने और श्रद्धालुओं के साथ बदसलूकी करने पर तीन माह की सजा और 10 हजार रुपये के जुर्माने की व्यवस्था है। बोर्ड का कहना है कि मंदिर में जाने से श्रद्धालुओं को रोकने का किसी को भी अधिकार नहीं है।
कोरोना संक्रमण को लेकर गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों ने जिला प्रशासन को नोटिस देकर कहा था कि 29 जुलाई से 15 अगस्त तक बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस पर बोर्ड ने सख्त संज्ञान लेकर जिलाधिकारी उत्तरकाशी को निर्देश दिए कि एक बार विरोध कर रहे तीर्थ पुरोहितों के साथ बैठक कर उन्हें समझाएं और एक्ट के तहत कार्रवाई के बारे में अवगत कराया जाए।
आपत्ति है तो सरकार को ज्ञापन दें
बोर्ड का कहना है कि बाहरी राज्यों से यदि कोई श्रद्धालु सरकार और देवस्थानम बोर्ड की गाइडलाइन का पालन कर दर्शन के लिए आता है तो उसे रोकने का अधिकार किसी को नहीं है। मंदिर किसी की निजी संपत्ति नहीं है, यदि श्रद्धालुओं को जबरन रोका जाता है तो एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
कोविड 19 को लेकर गाइडलाइन का पालन करने वाले बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं को चारधाम में दर्शन की अनुमति दी जा रही है। इस पर किसी को आपत्ति है तो वे ज्ञापन के माध्यम से सरकार के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं, जिस पर विचार किया जाएगा। लेकिन श्रद्धालुओं को रोकने पर जिला प्रशासन को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
-रविनाथ रमन, सीईओ, चारधाम देवस्थानम बोर्ड