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विभाग बांटने रावत देर से आए, लेकिन दुरुस्त नहीं

Wed, 05 Mar 2014 09:10 AM IST
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 05 Mar 2014 09:10 AM IST
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department distribution by harish rawat

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत 32 दिन से विभागों की जिस उलझी डोर को सुलझाने में जुटे थे वह और उलझ गई है।

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उनकी पहली कोशिश थी कि समान प्रकृति के विभागों को एक साथ किया जाए ताकि अधिकारियों को अलग-अलग मंत्रियों के पास न भागना पड़े।

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मंगलवार की रात को किए गए विभागों के बहुप्रतीक्षित बंटवारे में मुख्यमंत्री न तो मंत्रियों के पुराने विभागों में भारी फेरबदल और न ही समान प्रकृति के विभागों को एकसाथ कर पाए हैं।

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हरीश रावत के पास 16 विभाग

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मुख्यमंत्री ने अपने पास कुल 16 विभाग रखे हैं। विभागों को लेकर हरीश रावत ने सुबह राजभवन में राज्यपाल डॉ. अज़ीज़ कुरैशी से भेंट की।

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देर शाम मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने मीडिया को जानकारी दी। पिछले 32 दिनों से महत्वपूर्ण महकमों को लेकर काफी कयास लगाए जा रहे थे।

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पीडब्ल्यूडी पर सबसे ज्यादा मारामारी और तीन मंत्री दावा ठोंक रहे थे लेकिन तीनों में से ये किसी को नहीं मिला। ऊर्जा, आबकारी और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण महकमे भी मुख्यमंत्री ने अपने पास रखे हैं।

कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए रावत

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विभागों को लेकर मुख्यमंत्री ने दिल्ली में आलाकमान के साथ कई दौर की बैठकें की लेकिन कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए।

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पुराने मंत्रियों के साथ शपथ लेने के बाद हरीश रावत विभागों को लेकर नया प्रयोग करना चाह रहे थे। वैसा तो नहीं दिखा, हां कुछ नए विभागों का सृजन जरूर दिखा है।

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जैसे पहली बार ग्रामीण इलाकों की सड़कों और ड्रेनेज को महत्व मिला है। पशु चारा और चारागाह विकास के साथ बजट में घोषित भेड़ एवं बकरी पालन विभाग खुद मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा है।

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जबकि पशुपालन विभाग प्रीतम सिंह पंवार के पास है। मंत्री यशपाल आर्य को भारत-नेपाल नदी परियोजनाएं के तहत नई तरह जिम्मेदारी दी गई। अब वित्त और नियोजन एक साथ होंगे।

हरक को मिला पहाड़ी गांव चकबंदी का काम

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इसी प्रकार हरक सिंह को पहाड़ी गांव चकबंदी का नया काम मिला है जो कृषि से संबंधित है। हरक सिंह रावत को सैनिक कल्याण दिया गया है जबकि नया बना अर्द्धसैनिक कल्याण सुरेंद्र सिंह नेगी के पास होगा।

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प्रीतम सिंह को गृह जैसा महत्वपूर्ण विभाग दिया है लेकिन आधा अधूरा। आईपीएस और पीपीएस अधिकारी मुख्यमंत्री के अधीन ही रहेंगे।

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दिनेश अग्रवाल को वन देकर कद बढ़ाया लेकिन उससे जुड़ा पर्यावरण खुद अपने पास रखा है। इसी प्रकार अग्रवाल के पास खेलकूद तो रहा लेकिन युवा कल्याण अमृता रावत को दिया।

खाद्य प्रसंस्करण सुरेंद्र राकेश के पास

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हरक सिंह को वर्षा जल संग्रहण दिया गया है लेकिन जलागम मुख्यमंत्री के पास है। उद्यान हरक सिंह रावत को मिला है लेकिन खाद्य प्रसंस्करण सुरेंद्र राकेश के पास होगा।

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औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हरीश चंद्र दुर्गापाल के पास होंगे, जबकि तकनीकी शिक्षा के मंत्री यशपाल आर्य होंगे।

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वित्त और उससे जुड़े लगभग सभी विभाग इंदिरा हृदयेश को सौंपे गए हैं जबकि विश्व बैंक आदि से जुड़ी वाह्य सहायतित परियोजनाएं अमृता रावत को मिली हैं।

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