कांवड़ यात्रा के बीच डेंगू की दस्तक, हरिद्वार में एक मरीज भर्ती
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देहरादून में स्वाइन फ्लू से महिला की मौत के बाद अब रुड़की में डेंगू ने दस्तक दी है। एक बच्ची में प्लेटलेट कम होने के बाद चिकित्सक डेंगू की संभावना जता रहे हैं, हालांकि एलाइजा जांच करवाने के बाद डेंगू की पुष्टि हो पाएगी, लेकिन सिविल अस्पताल रुड़की में जानलेवा बीमारियों की रोकथाम के लिए कोई इंतजाम तक नहीं है।
जानकारी लेने पर अस्पताल कर्मियों ने पिछले साल बनाए गए डेंगू वार्ड का ताला खुलवाकर कमरे की धूल उतारी। रुड़की में डेंगू ने दस्तक दे दी है। धनौरी से शिवदासपुर तेलीवाला के उपप्रधान अशोक की बेटी शिवानी (15) को एक दिन पहले शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्लेटलेट कम पाए जाने पर डाक्टरों ने उसमें डेंगू की संभावना जताई है। फिलहाल अस्पताल में उसका उपचार चल रहा है, लेकिन मामला संज्ञान में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अंजान बना हुआ है।
यह स्थिति तब है जबकि पिछले कई वर्षों से अगस्त में डेंगू, चिकनगुनिया और स्वाइन फ्लू ने शहर से देहात तक कहर बरपाया। कई लोगों को बीमारियों से जान भी गंवानी पड़ी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इससे सबक नहीं लिया।
डेंगू वार्ड में भी सुविधाओं का अभाव
ऐसे में फिर शहर और आसपास के क्षेत्रों से उपचार के लिए रुड़की अस्पताल आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्षेत्र का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद वर्षों से यहां फिजिशियन की तैनाती नहीं हो पाई है।
इसके अलावा नाम के लिए बने डेंगू वार्ड में भी सुविधाओं का अभाव है। पिछले साल बनाए गए डेंगू वार्ड में अभी तक ताला लगा हुआ है। अंदर मच्छरदानी लगी है, लेकिन बेड पर चादर नहीं है।
अमर उजाला प्रतिनिधि के पहुंचने पर आनन फानन में स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से चादर बिछाई गई। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी हरिद्वार डा. रविंद्र थपलियाल का कहना है कि एलाइजा जांच के बिना डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती है।
हर साल इस सीजन में डेंगू को ध्यान में रखते हुए इंतजाम किए गए हैं। व्यापारियों सहित अन्य लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। फिजिशियन की तैनाती के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।