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सचिवालय में छह कार्य दिवस करने पर गुस्साए कर्मचारी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 13 Nov 2014 08:10 AM IST
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सचिवालय में पांच की जगह छह कार्य दिवस करने के उत्तराखंड कैबिनेट के फैसले पर कर्मचारी बिफर गए।
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सचिवालय संघ ने सरकार के इस निर्णय के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। कहा गया कि सरकार के आदेश वापसी तक आंदोलन जारी रहेगा।
आम सभा बुलाकर जताया विरोध
मंगलवार सुबह काम शुरू करने से पहले सचिवालय संघ ने एटीएम चौक पर प्रदर्शन कर आम सभा बुलाकर विरोध जताया। संघ के अध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद रतूड़ी, महामंत्री प्रदीप पपनै, ओमकार सिंह, पुष्कर सिंह नेगी, भूपेंद्र राणा, ब्योमकेश दूबे आदि मौजूद रहे।
जैसे ही काम बंद हुआ तो सचिवालय प्रशासन के सचिव पीएस जंगपांगी ने संघ के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए बुलाया। सचिव ने कहा कि अभी इस तरह का आदेश भी नहीं है इसलिए कार्य बहिष्कार वापस ले लेना चाहिए।
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यह भी कहा कि कार्य बहिष्कार से पहले संघ ने कोई नोटिस भी शासन को नहीं दिया। लेकिन संघ का कहना था कि इतना बड़े फैसले से पहले सरकार ने संघ से परामर्श नहीं किया इसलिए तत्काल कार्य बहिष्कार ही रास्ता बचा था।
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संघ ने कहा कि सचिवालय में छह कार्य दिवस होने के आदेश को वापस लिया जाए और नए अनुभागों का सृजन हो, तभी कार्य बहिष्कार वापस होगा। प्रदीप पपनै ने कहा कि यह तुगलकी फरमान है, सरकार इसे वापस ले। सचिवालय प्रशासन के सचिव ने कहा कि मुख्य सचिव अभी बाहर हैं, कल वह दून पहुंचेंगे और उसके बाद शासन स्तर पर कोई निर्णय लिया जाएगा।
- जिलों में छह दिन सभी कार्यालय खुलते हैं। जो धमनियों की तरह काम कर रहे हैं ऐसे में हृदय (सचिवालय) कैसे बंद रह सकता है। खून के संचालन के लिए उसका धड़कते रहना जरूरी है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश के कामकाज तेजी से हो सकें। कर्मचारियों को बायोमैट्रिक सिस्टम को किसी परेशानी के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इसका उद्देश्य राज्य को गतिमान करने का है। कर्मचारियों की बातों को भी सुना जा रहा है।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री