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Dehradun: बिल्डरों पर रेरा की नकेल; परियोजना शुरू होने से पहले अखबारों में छपवाना होगा बैंक खातों का विवरण

Fri, 08 May 2026 11:24 PM IST
Alka Tyagi माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Fri, 08 May 2026 11:24 PM IST
सार

बीते कुछ वर्षों में शहर और प्रदेश के अन्य हिस्सों में बड़े-बड़े बिल्डरों ने खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की है। जिसे देखते हुए बैठक में कई और महत्वपूर्ण फैसले भी खरीदारों के हक में लिए गए हैं।

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Dehradun RERA Strict on Builder Bank Details Must Be Published in Newspapers Before Project Commencement
रेरा (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

आवासीय परियोजनाओं के शुरू होने से पहले प्रमोटर्स को फर्म के बैंक खाता नंबरों को समाचार पत्रों में प्रकाशित कराना होगा। यही नहीं उन्हें ये खाता नंबर परियोजना परिसर में लगे बोर्ड, होर्डिंग और ब्रॉशर आदि में भी दर्ज कराने होंगे। ताकि बिल्डर के भाग जाने या फिर अन्य मामलों में बैंक खातों को ट्रेस करने में मदद मिल सके। यह निर्णय बृहस्पतिवार को रेरा के नए अध्यक्ष नरेश सी मठपाल की अध्यक्षता में हुई 36वीं बैठक में लिया गया।

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नरेश मठपाल को बृहस्पतिवार को ही अध्यक्ष बनाया गया है। इस बैठक में कई और महत्वपूर्ण फैसले भी खरीदारों के हक में लिए गए हैं। दरअसल, बीते कुछ वर्षों में शहर और प्रदेश के अन्य हिस्सों में बड़े-बड़े बिल्डरों ने खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की है। कई बिल्डर तो इस दरम्यान फरार भी हो गए। ताजा मामला पुष्पांजलि बिल्डर और शाश्वत गर्ग के प्रोजेक्ट से जुड़ा है। इनमें सबसे बड़ी समस्या इनके भाग जाने के बाद खातों को ट्रेस करने में आई थी। रेरा की जांच में पता चला था कि इन बिल्डरों के फर्म के अलावा भी कई अन्य खातों में लेनदेन हुआ है। ऐसे में जो काम कुछ दिनों या महीनों में होता उसमें अनावश्यक रूप से देरी का सामना करना पड़ा। ऐसे में रेरा के नए अध्यक्ष नरेश मठपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस संबंध में कड़ा निर्णय लिया गया है।
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अध्यक्ष मठपाल ने बताया कि रियल एस्टेट परियोजना का पंजीकरण प्राप्त होने के बाद प्रत्येक प्रमोटर के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह अपनी परियोजना से संबंधित बैंक खातों की सार्वजनिक सूचना एक राष्ट्रीय व एक राज्य स्तरीय समाचार पत्र में प्रकाशित करे। इसके अलावा ब्रॉशर और तमाम विज्ञापनों में भी इन खाता संख्या को लिखना होगा। ताकि, आम लोगों को इनकी जानकारी सुलभ हो सकेगी। इससे प्रमोटर की अन्य खातों में धनराशि प्राप्त करने की संभावना भी खत्म हो जाएगी। लोग उन्हीं खातों में पैसा जमा करेंगे जिनकी सूचना सार्वजनिक की गई है।

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बनाना होगा एक रिजर्व फंड, पांच साल तक नहीं निकालेंगे पैसा
इस बैठक में संभावित धोखाधड़ी के मामलों के मद्देनजर एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। अब प्रमोटर्स को एक रिजर्व फंड भी बनाना होगा। इसके लिए बैठक में सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इसमें आवंटियों से प्राप्त होने वाली धनराशि का एक अंश जमा कराना होगा। इस फंड से प्रमोटर्स परियोजना पूरी होने के पांच वर्षों बाद तक कोई पैसा नहीं निकाल सकेंगे। यही नहीं इसके बाद भी अगर पैसा निकालना है तो इसके लिए भी रेरा से अनुमति लेनी होगी। ऐसे में अगर कोई बिल्डर भाग जाता है या परियोजना लंबे समय से अधूरी है तो इस फंड से पैसा आवंटियों को दिया जा सकेगा। इस फंड में आवंटियों से आने वाली रकम में से कितनी राशि जमा करानी होगी इसके लिए निर्धारण प्रक्रिया बाद में शुरू की जाएगी। अगर परियोजना में कोई कमी होगी तो इसी फंड से यह कमी भी दूर कराई जाएगी।

परियोजना विस्तार संबंधी जानकारी भी करनी होगी सार्वजनिक
खाता संख्या के अलावा प्रमोटर्स को परियोजना के अवधि विस्तार और पंजीकरण संशोधन की जानकारी भी अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक करनी होगी। पुरानी पंजीकृत परियोजना को निरस्त कर उसमें नया पंजीकरण प्राप्त किए जाने के लिए प्राप्त होने वाले आवेदन पर स्वीकृति जारी करने से पहले प्राधिकरण की ओर से आवंटियों की आपत्तियों को भी अखबार में प्रकाशित कराना होगा। आपत्तियां यदि प्राप्त होती हैं तो उनका समयबद्ध निस्तारण करना भी आवश्यक होगा। ऐसा न करने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

रेरा को राज्य में और अधिक मजबूती प्रदान की जाएगी। इससे राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप राज्य में एक स्वस्थ पारदर्शी रियल एस्टेट इकोसिस्टम विकसित हो सकेगा। इसमें खरीदारों के हित पूरी तरह से सुरक्षित करने के लिए रेरा लगातार काम करेगा। रियल एस्टेट का कारोबार करने वाले तत्वों पर सख्ती से शिकंजा भी कसा जाएगा।
- नरेश सी मठपाल, अध्यक्ष, रेरा

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