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मौत बांटने वालों के आगे बेबस पुलिस
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 29 Aug 2014 10:41 AM IST
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बेलगाम वाहनों की रफ्तार पर रोक लगाने के लिए आकस्मिक चेकिंग ही एकमात्र सहारा है। बैरियर लगाकर चेकिंग करना संभव नहीं हो पाता। ‘दुर्घटना से देर भली’ के स्लोगन पर चलकर वाहन चालकों को अपनी और दूसरे की जिंदगी की कीमत समझनी होगी।
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एसपी ट्रैफिक प्रदीप कुमार राय की यह बात साफ करती है कि सड़कों पर मौत बांटने वाले कार चालकों के आगे पुलिस किस कदर बेबस है।
आम आदमी की जान से खेल रहे रईसजादों पर लगाम कसने में पुलिस नाकाम है। ऐसे में सड़क पर निकलने के दौरान अपनी हिफाजत का ख्याल खुद रखना ही दूनवासियों की नियति बन गया है।
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स्पीड सेंसर नहीं, कैमरे भी पुराने
दून पुलिस के पास वाहनों की रफ्तार नापने के लिए स्पीड सेंसर मौजूद नहीं हैं। पुलिस सूत्र बताते हैं कि तेज रफ्तार वाहनों पर लगाम कसने के लिए दो इंटरसेप्टर खरीदे तो गए थे, लेकिन ये खराब हैं।
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दूसरी ओर, शहर के प्रमुख चौराहों और सड़कों पर 32 क्लोज सर्किट टीवी कैमरे तो लगाए गए हैं, लेकिन इनमें रात की तस्वीरें साफ नहीं आ पाती।
एल्कोमीटर का नहीं इस्तेमाल
पुलिस के पास शराब पीकर वाहन चलाने वालों की जांच के लिए 30 एल्कोमीटर तो हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल रस्मी तौर पर किया जाता है।
होली, दीवाली जैसे त्योहारों पर ही पुलिस अभियान चलाती है। इसके बाद इन्हें स्टोर में धूल फांकने छोड़ दिया जाता है। हालांकि, एसपी ट्रैफिक का कहना है कि एल्कोमीटर से चेकिंग की जाती है, लेकिन यह प्रचारित नहीं हो पाती।
रात को सीपीयू कहां?
कुछ समय पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू ने बतौर ड्रीम प्लान सिटी पेट्रोलिंग यूनिट (सीपीयू) का गठन किया था। लेकिन, सीपीयू टीमें दोपहर के वक्त ही सक्रिय नजर आती हैं।
इसकी कार्रवाई भी सिर्फ हाथों में कैमरे लिए वाहनों का चालान काटने तक ही सीमित रहती है। जबकि अधिकतर हादसे रात में हो रहे हैं। कुछ दिन पूर्व सीपीयू को रात में तैनात करने का निर्देश आया था, लेकिन हादसे बताते हैं कि यह सक्रिय नहीं है।
रफ्तार बरसा रही मौत
- प्रेमनगर में बुधवार रात ही एक रईसजादे की बेलगाम कार ने एक छात्र की जान ले ली, हादसे में कई लोग कार से टकराकर घायल हुए।
- मोहकमपुर रेल फाटक के पास चंडीगढ़ के एक अधिकारी के बेटे की बेकाबू कार की चपेट में आकर कई लोग घायल हो गए थे। कार ने विधायक हरबंस कपूर की कार को भी टक्कर मार दी थी, कपूर बाल-बाल बचे थे।
- राजपुर के जाखन में एक छात्रा की बेकाबू कार ने घर के बाहर बैठी महिला की जान ले ली।
दिल्ली से लेंगे सीख
- दिल्ली पुलिस सौ स्पेशल कैमरा का उपयोग बेलगाम रफ्तार से चलने वाले लोगों के खिलाफ कर रही है।
- ये कैमरे एक वक्त में तीन तस्वीरें खींचती हैं रेगुलर, अल्ट्रा वायलेट और क्लोज अप, इन तस्वीरों में कार की नंबर प्लेट और ड्राइवर का चेहरा भी साफ नजर आता है।
- नंबर प्लेट की तस्वीर सेंट्रल सर्वर को भेजी जाती है, कार मालिक का पूरा ब्योरा सामने आ जाता है।
- 48 घंटों के भीतर मालिक के पते पर फोटो के साथ चालान डाक या कोरियर के जरिये भेजा जाता है।
- दस आधुनिक इंटरसेप्टर प्रमुख राजमार्गों पर, सामने से गुजरने वाली हर कार की रफ्तार स्पीड सेंसर में दर्ज हो जाती है।
- दिल्ली में 700 क्लोज सर्किट टीवी कैमरे अभी हैं, इन्हें बढ़ाकर 10 हजार किया जाने वाला है।
एमवी एक्ट में प्रावधान
धारा 112/183: तेज रफ्तार से वाहन चलाने वाले पर चार सौ रुपये का जुर्माना।
धारा 112/184: तेज रफ्तार से वाहन चलाकर लोगों की जान खतरे में डालने पर पहली बार में 900, दूसरी बार में 1800 रुपए जुर्माना, इसके अलावा कोर्ट के विवेकानुसार जेल की सजा।