देहरादून: ये है राजधानी का हाल...आपदा में टूटे स्कूल की मरम्मत कराना भूले जिम्मेदार, छत पर पढ़ रहे होनहार
रायपुर के मालदेवता से करीब चार किलोमीटर दूर सरखेत में बीते साल 2022 के अगस्त महीने में आपदा से राजकीय प्राथमिक विद्यालय क्षतिग्रस्त हो गया था। ऐसे में इस स्कूल के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए विभाग ने पास के ही दूसरे स्कूल में बच्चों के बैठने की व्यवस्था बनाई थी।
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देहरादून में रायपुर ब्लॉक के सरखेत में आई आपदा में क्षतिग्रस्त हुआ राजकीय प्राथमिक विद्यालय एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी नहीं बन पाया है। ऐसे में इस स्कूल के बच्चे पास के ही उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत पर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। वहीं, 16 बच्चों ने तो स्कूल ही छोड़ दिया है।
दरअसल, रायपुर के मालदेवता से करीब चार किलोमीटर दूर सरखेत में बीते साल 2022 के अगस्त महीने में आपदा से राजकीय प्राथमिक विद्यालय क्षतिग्रस्त हो गया था। ऐसे में इस स्कूल के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए विभाग ने पास के ही दूसरे स्कूल में बच्चों के बैठने की व्यवस्था बनाई थी। स्कूल की छत में एक कमरा और एक स्टोर रूम है। इनमें ही बच्चों को बैठाया और पढ़ाया जाता है।
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बच्चों की संख्या अधिक होने पर कई बार बच्चों को छत पर बैठा कर पढ़ाया जा रहा है। मंगलवार को भी बच्चों को छत पर बैठा कर पढ़ाया जा रहा था। छत पर बैठकर पढ़ाई करना तेज धूप और बारिश के दिनों बच्चों के लिए मुश्किल भरा होता है।
16 बच्चों ने छोड़ा स्कूल
आपदा से पहले प्राथमिक विद्यालय में 45 बच्चे पढ़ते थे। बैठने की व्यवस्था न होने के चलते 16 बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया। सरखेत के पूर्व प्रधान बिजेंद्र सिंह पंवार ने कहा कि राजधानी दून से सरखेत की दूरी महज 18 किलोमीटर है। बावजूद इसके एक साल बीत जाने के बाद भी स्कूल नहीं बन पाया। इतना ही नहीं गांव में टूटा पुल भी नहीं बन पाया है।
खस्ताहाल है उच्च प्राथमिक विद्यालय की हालत
उच्च प्राथमिक विद्यालय में दो स्कूल व दो जिलों के बच्चे पढ़ रहे हैं। उसकी भी हालत खस्ताहाल है। आलम यह है कि जर्जर भवन में न बैठने की व्यवस्था है और न ही बच्चों के लिए खेलने के लिए मैदान। वहीं, स्कूल की दीवार से लगा पंचायत घर भी क्षतिग्रस्त पड़ा है।
स्कूल भवन के पुनर्निर्माण के लिए 18 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। स्कूल के पास गदेरा है। ऐसे में भविष्य में अगर फिर से कोई आपदा आएगी तो फिर स्कूल क्षतिग्रस्त हो सकता है। इससे बचने के लिए दूसरी जगह तलाश की जा रही है। ग्रामीणों के साथ मिलकर जल्द दूसरी जगह तलाश कर नया स्कूल बनाया जाएगा।
- हेमलता गौड़, खंड शिक्षा अधिकारी, रायपुर ब्लॉक