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बच्ची का शव ले जाने के लिए पिता के पास नहीं थे पैसे, एनएचएम कर्मियों ने कराई व्यवस्था
Fri, 28 Aug 2020 01:14 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 28 Aug 2020 01:14 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
रीढ़ की हड्डी में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (एनटीडी) की गंभीर बीमारी से ग्रसित चार माह की बच्ची का शव घर ले जाने के लिए एक पिता के पास पैसे तक नहीं थे। यह देख राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपस में पैसा एकत्र करके बच्ची के शव को पहुंचाने की व्यवस्था की है।
पौड़ी जिले के थैलीसैंण ब्लाक की चार माह की बच्ची एनटीडी से ग्रसित थी। आशा कार्यकर्ता के माध्यम से उसे इलाज के लिए पौड़ी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से 18 अगस्त को उसे आईईआईसी (डिस्ट्रिक्ट अरर्ली इंटरवेशन सेंटर) देहरादून रेफर किया था। दून मेडिकल कॉलेज में कोविड के कारण डॉक्टर उपलब्ध न होने के कारण बच्ची को एक निजी अस्पताल भेजा गया। लेकिन इलाज के लिए अनुमोदन न होने के कारण निजी अस्पताल ने वापस आईईआईसी सेंटर भेज दिया।
जहां बच्ची के पिता की आर्थिक स्थिति देखते हुए कोरोनेशन अस्पताल से अनुमति देकर उसे दोबारा से निजी अस्पताल भेजा गया। जहां 19 अगस्त को बच्ची का एनटीडी का आपरेशन हुआ। बृहस्पतिवार को अस्पताल में बच्ची ने दम तोड़ दिया। लेकिन पिता के पास बच्ची के शव को ले जाने के लिए पैसे तक नहीं थे।
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एनएचएम मिशन निदेशक सोनिया तक मामला पहुंचने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों ने पैसा एकत्र करके शव को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. कुलदीप मार्तोलिया का कहना है कि बच्ची को बचपन से एनटीडी से पीड़ित थी।
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पौड़ी जिले के थैलीसैंण ब्लाक की चार माह की बच्ची एनटीडी से ग्रसित थी। आशा कार्यकर्ता के माध्यम से उसे इलाज के लिए पौड़ी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से 18 अगस्त को उसे आईईआईसी (डिस्ट्रिक्ट अरर्ली इंटरवेशन सेंटर) देहरादून रेफर किया था। दून मेडिकल कॉलेज में कोविड के कारण डॉक्टर उपलब्ध न होने के कारण बच्ची को एक निजी अस्पताल भेजा गया। लेकिन इलाज के लिए अनुमोदन न होने के कारण निजी अस्पताल ने वापस आईईआईसी सेंटर भेज दिया।
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जहां बच्ची के पिता की आर्थिक स्थिति देखते हुए कोरोनेशन अस्पताल से अनुमति देकर उसे दोबारा से निजी अस्पताल भेजा गया। जहां 19 अगस्त को बच्ची का एनटीडी का आपरेशन हुआ। बृहस्पतिवार को अस्पताल में बच्ची ने दम तोड़ दिया। लेकिन पिता के पास बच्ची के शव को ले जाने के लिए पैसे तक नहीं थे।
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एनएचएम मिशन निदेशक सोनिया तक मामला पहुंचने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों ने पैसा एकत्र करके शव को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. कुलदीप मार्तोलिया का कहना है कि बच्ची को बचपन से एनटीडी से पीड़ित थी।