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देहरादून : तीन साल के कड़े प्रशिक्षण के बाद आईएमए की मुख्य धारा में शामिल हुए एसीसी के 29 कैडेट
Sat, 05 Jun 2021 07:52 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 05 Jun 2021 07:52 PM IST
सार
अपनी कड़ी मेहनत और जब्बे के बूते वर्षों से सेना में अफसर बनने का सपना संजोए कैडेट अब नए मुकाम तक पहुंच गए हैं।
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भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए)
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) स्थित आर्मी कैडेट कॉलेज (एसीसी) के 117वें दीक्षा समारोह में 29 कैडेट को जेएनयू की डिग्री से नवाजा गया। एसीसी में तीन साल के कड़े प्रशिक्षण और पढ़ाई के बाद ये कैडेट आईएमए की मुख्यधारा से जुड़ गए हैं। अब एक साल के प्रशिक्षण के बाद ये सेना में बतौर अधिकारी शामिल हो जाएंगे।
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ये सभी 29 युवा सिपाही के रूप में सेना में भर्ती हुए थे। अपनी कड़ी मेहनत और जब्बे के बूते वर्षों से सेना में अफसर बनने का सपना संजोए कैडेट अब नए मुकाम तक पहुंच गए हैं। आईएमए के खेत्रपाल सभागार में आयोजित दीक्षा समारोह में कमाडेंट हरिंदर सिंह ने इन कैडेटों को स्नातक की उपाधि व अवॉर्ड प्रदान किए।
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उपाधि पाने वालों में 12 विज्ञान और 17 कैडेट कला वर्ग में स्नातक बने। कमांडेंट ने अफसर बनने की राह पर अग्रसर कैडेटों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कैडेटों को याद दिलाया कि एसीसी ने देश को बड़ी संख्या में ऐसे जांबाज अफसर दिए हैं, जिन्होंने अपनी क्षमता के बलबूते कई पदक जीते। जिनमें न केवल आईएमए के स्वार्ड ऑफ ऑनर, बल्कि असाधारण साहस व बलिदान के लिए मिलने वाले परमवीर चक्र व अशोक चक्र जैसे वीरता पदक भी शामिल हैं।
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आर्मी कैडेट कॉलेज के कई कैडेट सेना में उच्च पदों पर आसीन हुए हैं। उन्होंने कहा कि उपाधि पाने वाले कैडेटों की जिंदगी का यह एक अहम पड़ाव है। कहा कि उनके सामने कई चुनौतियां होंगी, मगर देश की आन, बान और शान बनाए रखने की जिम्मेदारी अब उनके हाथों में होगी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को बधाई देते कहा कि वह अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखें।
एसीसी विंग के कमांडर ब्रिगेडियर शैलेश सती ने कहा कि कैडेटों ने कोरोना काल के दौरान तमाम चुनौतियों के बावजूद अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। कहा कि उन्हें दुख है कि कोरोना के वजह से इस बार भी कैडेटों के परिजन दीक्षांत समारोह में शामिल नहीं हो पाए।
इन्हें मिला पुरस्कार
चीफ आफ आर्मी स्टाफ मेडल
गोल्ड: रितुराज सिंह
सिल्वर: विक्रम गौतम
ब्रांज: दुबल राणा
कमान्डेंट बैनर: बोगरा कंपनी
कमान्डेंट सिल्वर मेडल
सर्विस: दुबल राणा
ह्यूमैनिटीज: बिरेंद्र सिंह
साइंस: रितुराज सिंह
आर्मी कैडेट कॉलेज का सफर
आर्मी कैडेट कॉलेज (एसीसी) की नींव 'द किचनर कॉलेज' के रूप में वर्ष 1929 में तत्कालीन फील्ड मार्शल बिर्डवुड ने नौगांव (मध्य प्रदेश) में रखी। 16 मई 1960 में किचनर कॉलेज आर्मी कैडेट कॉलेज के रूप में कार्य करने लगा, जिसका शुभारंभ तत्कालीन रक्षा मंत्री वीके कृष्णा व जनरल केएस थिमैया ने किया।
यहां से कोर्स की पहला दीक्षा समारोह 10 फरवरी 1961 को हुआ। वर्ष 1977 में कॉलेज भारतीय सैन्य अकादमी से अटैच कर दिया गया। वर्ष 2006 में कॉलेज आईएमए का अभिन्न अंग बन गया। कॉलेज सैनिकों को अधिकारी बनने का मौका देता है। यहं से पास होकर कैडेट आईएमए में जेंटलमेन कैडेट के रूप में प्रशिक्षण लेकर सैन्य अफसर बनने की खूबियां अपने भीतर समाहित करते हैं।