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खाली हाथ, नगर निगम की सीमा विस्तार पर कैसे बनेगी बात
सुनीत द्विवेदी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 15 Sep 2017 10:00 AM IST
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सीमा विस्तार के बाद 60 गांव, 20 नए वार्ड की बड़ी जिम्मेदारी देहरादून नगर निगम को मिलने पर अब सबसे बड़ी चुनौती स्टाफ की कमी है। दरअसल, स्टाफ के मामले में निगम के हाथ खाली हैं।
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ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि निगम इन 60 नए गांवों में अपनी व्यवस्थाएं कैसे लागू करेगा? हालांकि अधिकारियों का दावा है कि वह निगम सीमा विस्तार को लेकर तैयार हैं।
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ढांचे और स्वीकृत पदों के हिसाब से देखें तो वर्तमान में निगम में 86 अधिकारियों के पद स्वीकृत हैं जबकि केवल 40 ही उपलब्ध हैं। बाकी 46 पद खाली पड़े हैं। इसी प्रकार, शहर की सफाई व्यवस्था के लिए भी करीब 1500 नए कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।
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नगर निगम के सामने हैं ये चुनौतियां
सफाई व्यवस्था : 1000 की आबादी पर दो सफाईकर्मी रखने का प्रावधान है। ऐसे में स्टाफ नहीं बढ़ने से सफाई व्यवस्था में दिक्कत आ सकती है।
स्ट्रीट लाइटें : शहर में स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था बुरी तरह बिगड़ी हुई है। अधिकतर सड़कों पर अंधेरा रहता है। कहीं स्विच खराब हैं तो कहीं लाइट खराब है। दायरा बढ़ने के बाद लाइटों की व्यवस्था करना निगम के लिए बड़ी चुनौती होगी।
जमीन की सुरक्षा : सीमा विस्तार के बाद नगर निगम क्षेत्र में करीब 60 गांव शामिल किए जाएंगे। ऐसे में निगम के पास काफी जमीन आ जाएगी। जिसकी सुरक्षा बढ़ी चुनौती होगी। इसके लिए तारबाड़ आदि कार्य कराने होंगे।
आवारा जानवर : वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या करीब 24 हजार है। यही स्थिति बंदरों और गोवंश की भी है। क्षेत्र विस्तार के बाद इनकी संख्या में बढ़ोतरी होनी तय है। अभी इन पर अंकुश लगाने में निगम नाकाम साबित हुआ है। ऐसे में लोगों को दिक्कत आना लाजिमी है।
वेंडिंग जोन : नगर निगम ने 17 लाख 50 हजार रुपये खर्च कर 27 वेंडिंग जोन बनाए हैं। सीमा विस्तार के बाद अवैध फड़-ठेली वालों की संख्या में इजाफा होगा। जिसके कारण निगम को दोबारा नए सिरे से एक्सरसाइज कर वेंडिंग जोन निर्धारित करना होगा।
अतिक्रमण : नगर निगम की ज्यादातर जमीन पर कब्जे हैं। जिन्हें खाली कराने में निगम के पसीने छूट रहे हैं। अतिक्रमण पर रोक लगाने के लिए निगम के पास कोई ठोस प्लान नहीं है। सीमा विस्तार के बाद निगम की जमीन को अतिक्रमण से बचाना बड़ी चुनौती होगी।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र : लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाने में काफी परेशानी आती है। महीनों चक्कर काटने के बाद उन्हें सर्टिफिकेट मिलता है। विस्तार के बाद लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए नगर निगम कार्यालय आना होगा। उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होगा।
अवैध होर्डिंग्स : निगम को होर्डिंग्स के जरिये सालाना काफी रेवेन्यू आता है। कार्रवाई के बावजूद शहर में कई जगहों पर अवैध होर्डिंग्स का बोलबाला है। नए क्षेत्रों के शामिल होने के बाद वहां अवैध होर्डिंग्स पर लगाम लगाना टेढ़ी खीर साबित होगी।
सफाई व्यवस्था में लगे कर्मी
कर्मचारी उपलब्ध जरूरत
स्थाई कर्मचारी 754 350
मोहल्ला स्वच्छता समिति 610 350
नाला गैंग स्वच्छक 120 250
दैनिक वेतन स्वच्छक 05 50
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन 284 600
मौजूदा स्टाफ से काम लिया जा रहा है। कई पद खाली होने की वजह से कई काम प्रभावित होते हैं। विस्तार के बाद स्टाफ की जरूरत पड़ेगी। बगैर स्टाफ काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
- रवनीत चीमा, नगर आयुक्त