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देहरादून लिट फेस्ट: अर्थव्यवस्था के बूस्टर पर यशवंत का तंज, मलेरिया में टाइफायड की दवा दे रही सरकार

Sat, 12 Oct 2019 07:17 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 12 Oct 2019 07:17 PM IST
सार

  • भारत के पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने देश की अर्थव्यस्था में सुधार के कदमों को बताया गलत
  • सरकार पर लगाया आरोप, सुधार के बजाय शेयर मार्केट से खेल रही सरकार

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Dehradun Literature Festival in second day
सेशन के दौरान यशवंत सिन्हा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने देश की वर्तमान अर्थव्यवस्था के हालातों पर सरकार के प्रयासों पर तंज कसा। कहा, अर्थव्यवस्था का यह बुरा दौर है। सरकार के प्रयास ऐसे हैं कि जैसे मलेरिया के मरीज को टायफायड की दवा दी जा रही हो। पहले नोटबंदी और फिर बिना तैयारी के राजनीतिक लाभ लेने को लागू की जीएसटी ने अर्थव्यवस्था को तोड़ दिया। अब जो प्रयास इसे सुधारने के लिए हो रहे हैं वह किसी भी दशा में सटीक नहीं हैं।

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‘देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल’ के दूसरे दिन (शनिवार) अपनी आत्मकथा ‘रेलेंटलेस’ पर चर्चा के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार को यही पता नहीं कि अर्थव्यवस्था में यह गिरावट क्यों आई है? मांग में कमी है, लोगों की परचेजिंग पावर कम हो रही है और सरकार है कि सप्लाई को टॉनिक दे रही है। यह अब तक के अर्थशास्त्र के सारे नियमों के विरुद्ध है। 

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शेयर बाजार से खेल रही सरकार

सरकार ने जितने बूस्टर दिए वे सब शेयर बाजार से खेलने वाले थे। वित्तमंत्री सुबह मार्किट खुलने से पहले घोषणा करती हैं और देखते ही देखते मार्केट 2,000 प्वाइंट की उछाल पा जाता है। ऐसे में ये सब एक वर्ग को हजारों करोड़ का फायदा पहुंचाने जैसा है। अब क्या हालत है ये सबके सामने है। मार्केट में लगातार गिरावट जारी है।

पांच परसेंट नहीं, इसे 2.5 के आसपास समझा जाए


दरअसल, केंद्र सरकार के पूर्व वित्तीय सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने जीडीपी के आंकड़ों को जो यूपीए-2 के समय के थे, उन्हें ओवर स्टेटेड बताया था। यह सब उन्होंने लंदन की एक यूनिवर्सिटी की स्टडी के आधार पर कहा था। बताया था कि वर्तमान में जो परिपाटी जीडीपी ग्रोथ को समझने की है उसमें 2 से 2.5 ज्यादा बैठता है। यानी आठ परसेंट को 5.5 परसेंट माना जाए। अब ऐसे में वर्तमान में जो पांच परसेंट दिखाई दे रहा है वह वास्तव में 2.5 परसेंट ही है।

हमने संघर्षों को चुना है : यशवंत


सिन्हा ने अपनी आत्मकथा में जीवन के हर पहलू को छुआ है। उन्होंने कहा कि मुझे कोई भी चीज प्लेट में सजी नहीं मिली। जीवन में यदि पेड़ पर कोई फ ल भी तोड़ना चाहा तो ऐसा लगा कि मानों पेड़ की लंबाई बढ़ गई। धीरे-धीरे जॉब, राजनीति सभी तरह के संघर्ष पर हमने आसानी से विजय पाई। अब जीवन के अंतिम दिनों में भी संघर्षों को चुना है।

‘सावधान इंडिया’ में फिर नजर आएंगे सुशांत सिंह

फिल्म एवं टीवी अभिनेता सुशांत सिंह जल्द ‘सावधान इंडिया’ में दोबारा नजर आएंगे। उन्होंने बताया कि उनकी नई किताब ‘क्वीन ऑफ  क्राइम’ आ गई है। कुलप्रीत यादव और उन्होंने मिलकर यह किताब लिखी है। इसी फेस्टिवल में यह किताब लॉन्च की जाएगी।

सुशांत सिंह ने कहा कि उन्हें लिखना-पढ़ना पहले से पसंद है। जब भी लिटरेचर फेस्टिवल जैसे कार्यक्रमों में उन्हें बुलाया जाता है, वह जाने की कोशिश करते हैं। देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल में रस्किन बॉन्ड जैसे बड़े साहित्यकार को देखना और सुनना अपने आप में एक यादगार पल है। उन्होंने बताया जल्द ही वह ‘सावधान इंडिया’ में नजर आएंगे।

इसके अलावा वेब सीरीज रंगबाज सीजन-2 में भी उनकी अदाकारी देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि देहरादून से उनका पुराना नाता है और वह अक्सर यहां आते रहे हैं। यहां का खानपान और मौसम उन्हें पसंद है। दून से मसूरी और मसूरी से दून के नजारे देखना अपने आप में शानदार अनुभव होता है।

हालांकि शहर में बढ़ती ट्रैफि क की समस्या पर उन्होंने चिंता जताई। अन्य शहरों की तरह देहरादून में भी ट्रैफिक एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है, जिसका समाधान जल्दी खोजना होगा। एयरपोर्ट से देहरादून के बीच हरियाली एक अलग अहसास कराती है।

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मीडिया चुप रहे तो समाज को पूछने होंगे सवाल

किसी भी घटना पर अगर मीडिया चुप रहे तो समाज को आवाज उठानी होगी। देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल में शुक्रवार को अंतिम सत्र में वरिष्ठ पत्रकार करण थापर ने यह बात कही। लिटरेचर फेस्टिवल में सुनंता मेहता ने करण थापर से चर्चा की। करण थापर ने कहा कि मीडिया को निष्पक्ष और विनम्र होना चाहिए लेकिन आज पत्रकारिता में काफी कुछ बदलाव आ गया है।

 

उन्होंने कहा कि समाज की आवाज कहलाने वाला मीडिया अब अपनी पसंद-नापसंद के अनुसार खबरें चलाता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि मीडिया पर आरोप लगाना आसान है। उन्होंने कहा कि भीड़ हिंसा के मामलों पर मीडिया की चुप्पी ठीक नहीं है। इसका हर स्तर पर विरोध होना चाहिए।

 

समाज में जो कुछ हो रहा है, उसे जनता तक पहुंचाना मीडिया का काम है। लेकिन अगर मीडिया इस मामले में चुप रहता है तो समाज को आवाज उठानी और सवाल पूछने चाहिए। राजनेताओं के इंटरव्यू में जटिल सवाल पूछने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह शुरुआत में ही कठिन सवाल पूछने में यकीन रखते हैं। वह इस बात के खिलाफ  हैं कि राजनेताओं से शुरुआत में आसान सवाल पूछे जाएं।

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