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सड़क हादसों की भी ‘राजधानी बना देहरादून’
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 30 Apr 2017 01:08 PM IST
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nagnath accident
- फोटो : file photo
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देहरादून ने बीते सालों में तरक्की की नई मंजिलों को देखा है। नई सुविधाएं जुटी और शहर का फैलाव भी हुआ है, लेकिन इस चमकदमक के पीछे एक चिंता में डालने वाली सच्चाई भी है।
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प्रदेश की यह अस्थाई राजधानी सड़क हादसों की राजधानी बन चुकी है। प्रदेश में सबसे ज्यादा हादसे देहरादून में हुए हैं। यह आंकड़े 108 इमरजेंसी सेवा न केवल जुटाए हैं बल्कि पुलिस को भी सौंपा है।
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108 इमरजेंसी सेवा ने 15 मई 2008 से 31 मार्च 2017(आठ साल से ज्यादा) तक अपनी एंबुलेंस से घायलों को अस्पताल को पहुंचाया था, उसका आंकड़ा जुटाया है वह चिंता में डालने वाला हैं। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में 2008 से 31 मार्च तक 11,75,515 सड़क हादसे का शिकार लोगों को अस्पताल में पहुंचाया गया।
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इसमें सबसे ज्यादा देहरादून के थे। इस अवधि में एंबुलेंस ने 33,367 जो सड़क हादसे की चपेट में आए थे, उनकी जिंदगी बचाने के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। हादसों के मामले में कुमाऊं का ऊधमसिंह नगर दूसरे नंबर पर है, यहां पर 23,299 और तीसरे नंबर पर हरिद्वार रहा है, यहां पर 21,157 सड़क हादसे के शिकार लोगों की मदद के लिए एंबुलेंस पहुंची। यह वह लोग हैं, जिन्हें 108 एंबुलेंस के माध्यम से पहुंचाया गया।
इसके अलावा अन्य सरकारी, निजी वाहनों का आंकड़ा अलग होगा। अगर कम हादसे की बात करें, तो उसमें बागेश्वर जिला आगे है, यहां पर 1134 लोगों को 108 की सेवा लेनी पड़ी। जीवीके इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के स्टेट हेड मनीष टिंकू कहते हैं कि इन सभी जानकारियों को पुलिस को सौंपा गया है, जिससे वह और बेहतर ढंग से सड़क हादसों को कम करने के लिए कार्य कर सकें। इसके अलावा हादसों को कैसे कम किया जा सकता है, उसका भी सुझाव दिया गया है।
सबसे ज्यादा युवा हो रहे शिकार
किस आयु वर्ग के लोग सड़क हादसे का शिकार हो रहे हैं, इसका भी ब्यौरा जुटाया गया है। उसके अनुसार कुल दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा युवा (15 से 35 साल) 61 प्रतिशत शामिल हैं। इसमें 63 प्रतिशत हादसे की चपेट में दोपहिया वाहन चालक आए हैं।
शाम छह बजे बाद दुर्घटनाएं ज्यादा
11,75,515 सड़क हादसे हुए हैं, इसमें सबसे ज्यादा हादसे का समय शाम छह से लेकर 10 बजे का था। इस दौरान 33,353 दुर्घटनाएं हुई। इसके बाद दोपहर दो से छह बजे का समय रहा, इसमें 29,093 दुर्घटनाएं हुई हैं। यानी की दोपहर के बाद से हादसों की संख्या बढ़ना शुरू हुई है।