Dehradun Film Festival: इराक में मना ‘चिंटू का बर्थडे’ तो देहरादून में खूब बजी तालियां
Dehradun International Film Festival 2021: तीन दिवसीय फिल्म महोत्सव के पहले दिन नौ लघु फिल्मों को प्रदर्शित किया गया। अभिनेता विनय पाठक ने कहा कि फिल्मों में बाल साहित्य को बढ़ावा देने के लिए वह लगातार काम कर रहे हैं। बाल साहित्य के जरिए बड़े पर्दे से हर उम्र के लोगों तक संदेश पहुंचाया जा सकता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का शुक्रवार को आगाज हो गया। फिल्मोत्सव के पहले दिन बॉलीवुड अभिनेता विनय पाठक की फिल्म चिंटू का बर्थडे प्रदर्शित की गई। इराक के एक घर में फिल्माई गई फिल्म में मदन तिवारी (विनय पाठक) के बेटे चिंटू (वेदांत छिब्बर) के जन्मदिन का उत्सव वाला दृश्य दूनवासियों को खूब भाया। फिल्म के किरदारों की अदाकारी देख दर्शकों ने खूब तालियां बजायीं।
Dehradun Film Festival: मुख्यमंत्री ने किया फिल्म फेस्टिवल का आगाज, सभागार में गूंजा 'हैप्पी बर्थ डे सीएम'
तीन दिवसीय फिल्म महोत्सव के पहले दिन नौ लघु फिल्मों को प्रदर्शित किया गया। अभिनेता विनय पाठक ने कहा कि फिल्मों में बाल साहित्य को बढ़ावा देने के लिए वह लगातार काम कर रहे हैं। बाल साहित्य के जरिए बड़े पर्दे से हर उम्र के लोगों तक संदेश पहुंचाया जा सकता है।
कोरोना के तेजी से कम होते मामलों के बीच खतरा अभी टला नहीं
अपनी आगामी फिल्मों के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि चार फिल्में बनकर तैयार हैं। कोरोना से स्थिति सामान्य होने के बाद देश भर के सिनेमाघरों में उन्हें जल्द रिलीज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना के तेजी से कम होते मामलों के बीच खतरा अभी टला नहीं है। ऐसे में मास्क पहने और सोशल डिस्टेंस के नियमों का कढ़ाई से पालन किया जाए।
वहीं बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मेयर सुनील उनियाल गामा ने कहा कि उत्तराखंड में कलाकारों की कमी नहीं है। उन सभी कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल मंच उपलब्ध करा रहा है। लंबे लॉकडाउन के चलते हर क्षेत्र को नुकसान हुआ है। कोरोना से जल्द निपटने के लिए हमें सरकार और प्रशासन का सहयोग करना होगा। इस मौके पर फेस्टिवल के मुख्य आयोजक राजेश शर्मा भी मौजूद रहे।
ओटीटी ने दर्शकों को सिनेमा से जोड़े रखा
बॉलीवुड अभिनेता विनय पाठक ने कहा कि कोरोनाकाल के मुश्किल समय में ओटीटी प्लेटफार्म ने ही लोगों को सिनेमा से जोड़े रखा। ओटीटी नहीं होता तो लोग अब तक फिल्मों और सिनेमा का भूल चुके होते। दर्शकों ने अपनी पसंद के अनुसार सिनेमा देखा और संकट के समय परिवार के साथ मनोरंजन किया। समय के साथ बदलाव जरूरी और महत्वपूर्ण है। ओटीटी उसी बदलाव का नतीजा है। जिसे दर्शकों ने खूब प्यार दिया है।
सवाल-जवाब
सवाल: फिल्म चिंटू का बर्थडे में मदन तिवारी का किरदार निभाना कितना मुश्किल काम था : रमा गोयल
जवाब: कोई भी काम मुश्किल या आसान नहीं होता। मदन तिवारी का किरदार निभाने के लिए मैंने कई बार फिल्म की कहानी पढ़ी। कहानी पढ़ते-पढ़ते किरदार को समझना बहुत आसान हो जाता है।
सवाल: आज कल की फिल्मों में दिखाए जाने वाले वल्गर सीन से बच्चों पर बुरा असर पढ़ता है आप क्या सोचते हैं इस बारे में : नरेश बोहरा
जवाब: जिन फिल्मों से आपको या आपके बच्चों पर बुरा असर पड़ता है आप उन फिल्मों को न देखे तो अच्छा होगा। पब्लिक की डिमांड पर ही फिल्में बनाई जाती हैं। यह दर्शकों पर निर्भर करता है कि उसे क्या देखना है और क्या नहीं।
सवाल: फिल्म फेस्टिवल से युवा कलाकारों और शहर को कितना लाभ मिलेगा : हरी ओम शर्मा
जवाब: फिल्म फेस्टिवल एक अवसर है प्रतिभा को मंच देकर उत्साह मनाने का। इस तरह के फिल्म फेस्टिवल से सभी कलाकारों को लाभ मिलता है और कलाकारों के साथ शहर को भी पहचान मिलती है।
मंच और शाबाशी मिली तो गदगद हुए युवा फिल्मकार
राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी में आयोजित दून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में शुक्रवार को दर्शकों ने कई फिल्मों का लुत्फ उठाया। अपनी फिल्मों में दूनवासियों की दिलचस्पी देख युवा फिल्म निर्माता बेहद खुश नजर आए। फिल्म देखने के लिए उमड़ी भीड़ ने युवा निर्माताओं का हौसला बढ़ाया।
फेस्टिवल में दिखाई गई फिल्म ‘राइट एंड रांग’ और गोपाल 56 में डायरेक्शन करने वाली श्रुति कौल और नवीन ने बताया कि उन्होंने इससे पहले भी फिल्म फेस्टिवल में अपनी फिल्मों को दिखाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन इस बार उनकी फिल्मों को फिल्म फेस्टिवल में जगह मिल पाई। फिल्म ‘राइट एंड रांग’ में पांडवाज क्रिएशन, निशांत मिश्रा, रचना जोशी का सहयोग रहा। गोपाल 56 में गौरव गोयल का विशेष सहयोग मिला। 2018 में बनाई गई ‘राइट एंड रांग’ फिल्म एक लड़की सपनों को पर आधारित है। गोपाल 56 एक पिता के संघर्ष की कहानी है।
अपनी फिल्म को बड़े पर्दे पर देखना, मेेरे लिए सपने का पूरा होने जैसा है। मैं बहुत खुश हूं। इस तरह के मंच की जरूरत युवाओं को है, जो अपने काम को दिखाना चाहते हैं। खासतौर पर लोकल टैलेंट को मंच मिलना बहुत जरूरी है। आज हमें एक नई ऊर्जा मिली है। लोगों से मिली प्रतिक्रियाओं के बाद हम और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित हुए हैं।
-श्रुति कौल, फिल्म निर्माता
देहरादून में इस तरह के आयोजन का कल्चर शुरू हो गया है, जोकि हम जैसे युवाओं के लिए खुशी की बात है। इतने सारे निर्माता अपनी फिल्म को बड़ी स्क्रीन पर दिखाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं और हमारी फिल्म को चुना गया। यह हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस क्षेत्र में उभरते युवाओं के लिए यह अच्छी पहल है।
-नवीन जोशी, फिल्मकार
मुझे बहुत मजा आया। जब से मुझे पता चला था कि फिल्म फेस्टिवल आयोजित होने वाला है। तब से मैं बहुत उत्सुक था। सुबह जल्दी ही मैं और मेरे दोस्त यहां पहुंच गए थे। हमें अच्छी और कुछ हटके फिल्में देखने को मिलीं।
-मनोज, जीएमएस रोड
फिल्म फेस्टिवल के कारण पूरे शहर का मूड चेंज हो गया। ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए। अच्छी फिल्में देखने को मिल रही हैं। युवा वर्ग खासतौर पर बहुत उत्साहित है। लंबे समय बाद हमें भी अपने शहर में कुछ अलग देखने को मिल रहा है। तीन दिन के इस आयोजन का मैं और मेरे दोस्त पूरा मजा लेंगे।
- शुभम, धर्मपुर