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देहरादून का पहला ट्रैफिक प्लान तैयार, नजर तो डालिए
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 11 Sep 2016 09:47 AM IST
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- फोटो : amarujala
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जाम से निजात के लिए देहरादून का पहला ट्रैफिक प्लान बनकर तैयार है। ट्रैफिक और सिविल पुलिस की ओर से तीन भागों शार्ट टर्म, मिड टर्म और लांग टर्म प्लान दिया गया है, जिन्हें एक साल से पांच साल के बीच लागू करने का प्रस्ताव है। प्रदेश सरकार की मंजूरी के बाद ही इस प्लान को लागू किया जा सकेगा।
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कहा गया है कि यदि सुनियोजित प्लान बनाकर काम नहीं किया गया तो शहर की ट्रैफिक को संभालना बूते से बाहर की बात होगी। इस प्लान में सचिवालय, पुलिस मुख्यालय, कोर्ट और पुलिस अधिकारियों के ऑफिसों के साथ ही कई बड़े शिक्षण संस्थानों और शोरूमों को बाहर शिफ्ट करने का प्रस्ताव है।
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प्रस्ताव में आढ़त बाजार को शिफ्ट करने के साथ ही बड़े अतिक्रमणों को हटाने के लिए ठोस फैसले लेने की वकालत की गई है। इसके अलावा दून मेडिकल कॉलेज खुलने से जाम की समस्या और विकराल होने की संभावना जताई गई है। कहा गया है कि कोर्ट कचहरी के अलावा पुलिस प्रशासन के तमाम ऑफिस इसके करीब हैं। लिहाजा जाम और बढ़ सकता है।
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ट्रैफिक प्लान में खास
- सचिवालय, पुलिस मुख्यालय, कोर्ट और सरकारी कार्यालय बाहर शिफ्ट किए जाएं।
- देहरादून रेलवे स्टेशन को हर्रावाला स्थानांतरित किया जाए।
- आढ़त बाजार को दूसरे स्थान पर किया जाए स्थानांतरित।
- डाट काली टनल का किया जाए चौड़ीकरण।
- भंडारी बाग से रेस्ट कैंप तक फ्लाईओवर का निर्माण किया जाए।
- हरिद्वार रोड स्थित रोडवेज वर्कशाप को आईएसबीटी स्थापित किया जाए।
- सेंट जोसेफ, सेंट थामस, जसवंत मॉर्डन, मार्शल स्कूल के अलावा केएफसी, बीकानेर, डीडी मोटर्स और होंडा शोरूम भी शिफ्ट किए जाएं। इन संस्थानों के पास नहीं है पार्किंग स्थल।
हर तरफ नजर आएगा जाम
ट्रैफिक पुलिस के प्रस्ताव में कहा गया है कि देहरादून में शिक्षित लोगों की संख्या अधिक होने के बावजूद लोगों में ट्रैफिक सेंस की कमी है। शहर में बढ़ते शैक्षिक संस्थानों की संख्या और वाहनों की वृद्धि हुई है। यदि इसी तरह अनियोजित तरीके से विकास होता रहा तो शहर के तमाम मार्गों पर जाम ही जाम नजर आएगा। सुनियोजित प्लान के अनुसार काम नहीं हुआ तो यातायात व्यवस्था को संभालना मुमकिन नहीं होगा।
राजधानी के इस ट्रैफिक प्लान में बढ़ते वाहनों की तादाद, संकरी होती सड़कों, बाधक बने संस्थानों का उल्लेख करते हुए भविष्य के दृष्टिगत सुधार के प्रस्ताव दिए गए हैं। यह प्लान एक से लेकर आगामी पांच साल तक लागू करना है। कुछ स्थानों पर फ्लाईओवरों के निर्माण के अलावा सरकारी कार्यालयों को बाहर शिफ्ट करने और नए वैकल्पिक मार्गों को लेकर सुझाव दिए गए हैं।
- धीरेंद्र गुंज्याल, पुलिस अधीक्षक यातायात
चुनावी साल में होगी मुश्किल
चुनावी साल होने के कारण सरकार के लिए ट्रैफिक प्लान को मंजूरी देना आसान नहीं होगा। क्योंकि ट्रैफिक सुधार के लिए कई बड़े फैसले लेने होंगे, जो सीधे तौर से व्यापारी वर्ग से जुड़े हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार इस प्लान को कितनी गंभीरता से लेती है।