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Dehradun: 10वीं-12वीं की फर्जी मार्कशीट बेचने वाले गिरोह का सरगना गिरफ्तार, आठ से 10 हजार में करता था सौदा

Mon, 13 Mar 2023 10:01 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 13 Mar 2023 10:01 PM IST
सार

जांच में पता चला कि आरोपियों ने एनसीआरई नाम से ट्रस्ट खोला था। ये लोग केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन बताते थे। इसी के जरिये 10वीं और 12वीं की मार्कशीट बनाकर आठ से 10 हजार में बेचते थे।

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Dehradun Crime News: Gang leader arrested for selling fake marksheet of class 10th and 12th class
गिरफ्तारी - फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

देहरादून में घंटाघर के पास कांप्लेक्स में 10वीं और 12वीं की फर्जी मार्कशीट बनाकर बेचने वाले गिरोह के सरगना को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने अपने साथी के साथ मिलकर फर्जी ट्रस्ट बनाया था। उसका साथी पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। गिरोह में और भी सदस्य हो सकते हैं। पुलिस और एसटीएफ उनकी तलाश में जुटी है।

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एसटीएफ के एसएसपी आयुष अग्रवाल ने बताया कि दो फरवरी को एमडीडीए कांप्लेक्स में चल रहे इस धंधे का कोतवाली पुलिस ने भंडाफोड़ किया था। यहां एक ऑफिस में छापा मारकर राजकिशोर राय को गिरफ्तार किया गया था।
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जांच में पता चला कि आरोपियों ने एनसीआरई नाम से ट्रस्ट खोला था। ये लोग केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन बताते थे। इसी के जरिये 10वीं और 12वीं की मार्कशीट बनाकर आठ से 10 हजार में बेचते थे। शुरुआती जांच में पता चला था कि सैकड़ों लोगों को ऐसी मार्कशीट बनाकर बेची गई है।

इस मुकदमे का पर्यवेक्षण एसटीएफ कर रही है। इसी क्रम में पता चला कि राजकिशोर राय का एक और साथी सहेंद्र पाल इस गिरोह का सरगना है। रविवार को सहेंद्र पाल निवासी खतौली को मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने बताया कि वह राजकिशोर राय को बीते आठ साल से जानता है। राजकिशोर ने ही उसे फर्जी मार्कशीट बनाने की योजना बताई थी। इसके लिए उन्होंने फर्जी ट्रस्ट खोला। इसमें वह खुद सदस्य था और राजकिशोर के साथ मिलकर फर्जी मार्कशीट छापता था।

फर्जी मार्कशीट से कई लोग कर रहे सरकारी नौकरी
शुरुआती जांच में पुलिस को पता चला था कि उसने ये मार्कशीट देहरादून और स्थानीय लोगों नहीं बांटी है। इन्हें बिहार और आसपास के राज्यों के निवासियों को बेचा जाता था। बताया जा रहा है फर्जी मार्कशीट से बिहार में कई लोग सरकारी नौकरियां भी कर रहे हैं। एसटीएफ और पुलिस इस तथ्य की भी जांच कर रही है।

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