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देहरादून में भी ठिकाने कई
देहरादून/ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jul 2013 05:41 PM IST
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ईश्वरीय विधान के अनुसार भगवान विष्णु पिछले आठ महीने से संसार की देख-रेख कर रहे हैं। 19 जुलाई को देवशयनी एकादशी को भगवान सोने जा रहे हैं। चार महीने तक शेषशैय्या पर आराम करने के बाद भगवान 13 नवम्बर को देवप्रबोधनी एकादशी के दिन जागेंगे। इस बीच भगवान शिव ही संसार की देखरेख की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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शास्त्रों में आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी को चतुर्मास कहा गया है। कहते हैं कि इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए, खासकर विवाह, जनेऊ, मुंडन के लिए यह वर्जित समय होता है। इस दौरान इन शुभ संस्कारों का आयोजन करने पर भगवान की कृपा नहीं मिलती और वैवाहिक जीवन में परेशानी एवं संस्कारों का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है।
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चतुर्मास के दौरान भगवान शिव रूद्र रूप में शासन करते हैं। रूद्र न्याय के मामले में बड़े ही सख्त हैं। इसलिए इन चार महीनों में सात्विक भाव से शिव की पूजा करनी चाहिए। अपना कल्याण चाहने वालों को मांस, मदिरा, झूठ, लोभ, परनिंदा, काम, क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए। भगवान विष्णु इन चार महीनों में जल में निवास करते हैं इसलिए जल में विष्णु का तेज मौजूद रहता है।
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सूर्योदय से पूर्व उठकर बेलपत्र तिल और आंवले का उबटन लगाकर नदी अथवा तालाब में स्नान करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य उत्तम रहता है।
पुराणों के अनुसार इन चार माह में शिव की भक्ति करने वालों पर शिव की कृपा बनी रहती है और मनोवांछित फल मिलता है। प्राचीन काल में इस दौरान लोग अपना पूरा ध्