फौज में जाने के लिए छोड़ी 12 लाख की नौकरी, अफसर बनकर गर्व से चौड़ा किया हवलदार पिता का सीना
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देश की सेना का हिस्सा बनने के लिए इसे दीपक की दीवानगी ही कहेंगे, जो उन्होंने 12 लाख रुपये सालाना का पैकेज छोड़ दिया। जी हां, नैनीताल जिले के लालकुआं स्थित बिंदुखत्ता निवासी दीपक सिंह बिष्ट ने ऐसी ही मिसाल कायम कर पिता और परिवार का नाम रोशन किया है। दीपक ने बीटेक की पढ़ाई की और दो साल तक भारत पेट्रोलियम में बतौर टेक्निकल इंजीनियर काम किया।
दीपक के पिता प्रताप सिंह बिष्ट चार असम राइफल्स में हवलदार हैं। वर्तमान में वे मणिपुर (नागालैंड) में तैनात हैं। प्रताप सिंह बिष्ट बताते हैं कि बचपन से ही दीपक फौज में जाने का जज्बा रखता था। जब भी मौका मिलता, वह मेरी वर्दी पहनकर घूमता और कहता था कि मुझे सैल्यूट करिए। आज सच में उसे सैल्यूट मारने का मन कर रहा है। दीपक ने बीटेक की पढ़ाई पूरी करने का बाद वर्ष 2014 में मुंबई स्थित भारत पेट्रोलियम में 12 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी कर ली।
दीपक के अनुसार दो साल तक नौकरी तो की, लेकिन मन सेना में जाने के लिए उफान मारता रहा। इसके चलते नौकरी छोड़कर बचपन के सपने को पूरा करने में जुट गया। वर्ष 2017 में टेक्निकल ग्रेजुएट कमीशन के जरिये भर्ती हुआ और आज अफसर बनने का सपना साकार हो गया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पिता प्रताप व माता शांति को दिया। दीपक के दादा मोहन सिंह भी सेना में थे।
तीसरी पीढ़ी का अफसर बनकर व्रतेश ने पिता को किया सैल्यूट
राजधानी के डिफेंस कालोनी निवासी व्रतेश कुलाश्री परिवार का तीसरी पीढ़ी का अफसर बना है। इससे पहले उनके दादा और पिता सेना में सेवाएं दे चुके हैं। व्रतेश ने अफसर बनने के बाद अपने पिता को सैल्यूट किया। व्रतेश के पिता कर्नल विजय कुमार शिलांग में पोस्टेड हैं। उनके दादा ऑनरेरी लेफ्टिनेंट राजाराम कुलाश्री भी सेना से रिटायर्ड हैं।
व्रतेश का कहना है कि परिवार से ही उन्हें सेना में जाने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई आर्मी पब्लिक स्कूल क्लेमेंटटाउन से पूरी करने के बाद एनडीए की परीक्षा पास की। एनडीए से प्रशिक्षण लेने के बाद व्रतेश आईएमए पहुंचे। शनिवार को हुई पीओपी के बाद व्रतेश जैसे ही अफसर बने तो सबसे पहले उन्होेंने अपने कर्नल पिता को सैल्यूट किया।