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टूटी सड़कें, डॉक्टर नहीं, जन्म से पहले गई जान

Mon, 26 Aug 2013 08:29 PM IST
अमर उजाला, नई टिहरी
अमर उजाला, नई टिहरी Updated Mon, 26 Aug 2013 08:29 PM IST
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death of infant before birth in tihari uttarakhand

उत्तराखंड में आपदा के बाद टूटी सड़क और लचर व्यवस्था एक बार फिर मौत का कारण बन गई। प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को परिजन इलाज के लिए उठाए इधर से उधर भटकते रहे। कहीं टूटी सड़क रोड़ा बन गई तो कहीं अस्पतालों की लचर व्यवस्था।

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समय पर इलाज नहीं मिलने से बच्चे की जन्म लेने से पहले ही मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने सीएमओ और लोनिवि के अधिशासी अभियंता का घेराव कर अपना विरोध प्रकट किया। जाखणीधार ब्लाक में ग्राम धारकोट की प्रधान रौनकी देवी (33) पत्नी नरेंद्र सिंह को शनिवार की रात करीब 11 बजे प्रसव वेदना होने पर परिजन अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धारकोट ले गए लेकिन वहां न तो डाक्टर मिला और न अन्य चिकित्सीय कर्मी।
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न तो डॉक्टर मिला और न ही कोई नर्स

दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस बुलाई गई पर मुंडोली में सड़क बंद होने के कारण वह भी नहीं पहुंच पाई। परिजन जैसे-तैसे प्रसूता को मुंडेती तक और फिर 108 सेवा से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नंदगांव लाए। इस पर भी दुश्वारियां कम नहीं हुई। वहां भी न तो डॉक्टर मिला और न ही कोई नर्स। परेशान परिजन फिर महिला को लेकर चले और सुबह करीब चार बजे जिला अस्पताल पहुंचे। वहां डाक्टरों की मदद से प्रसव तो हो गया लेकिन नवजात को नहीं बचाया जा सका।
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बच्चे को बचाया जा सकता था

तमाम प्रयास करके भी बच्चे को बचा पाने में विफल रहे परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल में हंगामा किया। उनका कहना था कि अगर सड़कें ठीक होती तो वे समय से महिला को जिला चिकित्सालय ला सकते थे या फिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोई चिकित्सा कर्मी मिल जाता तो भी बच्चे को बचाया जा सकता था।

हंगामे की सूचना मिलने पर एडीएम प्रवेशचंद्र डंडरियाल, सीएमओ डा. एसपी अग्रवाल और लोनिवि के अधिशासी अभियंता अस्पताल पहुंचे। परिजनों ने उनका घेराव कर प्रदर्शन किया। उन्होंने धारकोट सीएससी में चिकित्सक की नियुक्ति और दूसरी जगह अटैच किए गए फार्मेसिस्ट की तैनाती की मांग की। घेराव करने वालों में योगेंद्र नेगी, नरेंद्र सिंह, घनश्याम पंवार, राकेश राणा, यशपाल मिश्रवाण आदि शामिल थे।


पता चला है कि प्रसूता को अत्यधिक रक्तस्राव हो गया था, इस स्थिति में ऑपरेशन के बिना सुरक्षित प्रसव कराना संभव नहीं होता, पीएचसी स्तर पर इस तरह के प्रसव कराने में मुश्किल होती है। चिकित्सकों की कमी पूरी करने के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को कई बार  प्रस्ताव भेजे गए हैं।
-डा. एसपी अग्रवाल, सीएमओ टिहरी।

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