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रफ्तार के रोमांच में बुझ गए कई चिराग
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 08 Sep 2014 11:21 AM IST
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अगर हेलमेट लगाया होता तो राजधानी देहरादून में इस साल 31 घरों के चिराग जल रहे होते।
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खुद अपनी जान से खिलवाड़ कर रहे बाइक सवार
पिछले तीन साल में राजधानी में लोगों की जान लेने वाले हादसों की संख्या लगातार बढ़ी है। यह संख्या कम हो सकती थी अगर परिवार जागरूक होते और अपने लाडलों को पहले तो साइकिल चलाने की उम्र में पावर फुल बाइक न थमाई होती।
दूसरा लाडलों की जिद के आगे झुक ही गए तो हेलमेट भी दिला देते। आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष अब तक 96 लोग जान गवां चुके हैं। इनमें अधिकांश मौतें बाइक सवारों की है।
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राजधानी की सड़कों पर होने वाले हादसों में मारे जाने वाले लोग कुछ वाहन चालकों की तेज रफ्तार का शिकार होते हैं, वहीं कई खुद अपनी जान से खिलवाड़ करते हैं। दरअसल, दून में हेलमेट पहनना अनिवार्य है। शहर में तो पुलिस दोपहिया वाहन चालकों पर नजर रखती है।
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हेलमेट न पहनने वालों का चालान भी किया जाता है। इसके बावजूद कुछ लोग जान बचाने वाले हेलमेट से परहेज करते हैं। हादसों में जान गवांने वाले दोपहिया वाहन चालकों में से अधिकतर हेलमेट न पहनने की वजह से सिर पर चोट लगने से ही मारे जाते हैं।
पिछले तीन साल में ही 125 युवा बाइक एक्सीडेंट में मारे गए। लापरवाही से मरने की वालों की यह एक बड़ी संख्या है।
हादसों पर नजर
वर्ष - हादसे - मृत्यु - घायल - मौत बाइक सवार
2014 - 185 - 96 - 180 - 44
2013 - 296 - 138 - 274 - 50
2012 - 325 - 136 - 273 - 31
(2014 के आंकड़े पांच सितंबर तक)
‘नो एंट्री’ में बेधड़क एंट्री
देहरादून में नो एंट्री के बावजूद भारी वाहन बेधड़क प्रमुख चौराहों, रास्तों में प्रवेश कर रहे हैं। पुलिस कुछ दिन सक्रियता दिखाती है, लेकिन जल्द ही अभियान हवा हो जाते हैं। नतीजा हादसों के तौर पर सामने आता है।
निरंजनपुर मंडी गेट से शिमला बाईपास तिराहे तक दिनभर भारी वाहनों की रफ्तार से हर वक्त अनहोनी की आशंका बनी रहती है। सहस्त्रधारा रोड पर गुरुवार को ट्रक के कुचलने से हुई दो स्कूली बच्चियों की मौत के बाद अब स्कूल टाइम में भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने अथवा उनकी स्पीड पर कंट्रोल की मांग उठी है।
सहस्त्रधारा रोड के अमित कुमार, कुलदीप आदि का कहना है कि स्कूल की छुट्टी के वक्त हवा में दौड़ने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करें। उनका कहना है कि मयूर विहार चौकी पुलिस सजग होती तो दोनों मासूमों की जान बच सकती थी। पुलिस अब सक्रिय हो तो भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति से बचा जा सकता है।
हादसों को रोकने के लिए यातायात पुलिस गंभीर है। सीपीयू के प्रयासों से शहर में हेलमेट की अनिवार्यता बढ़ी है, लेकिन बाहरी सड़कों पर लोग अब भी हेलमेट पहनने से गुरेज कर रहे हैं। कुछ लोग शहर से निकलते ही हेलमेट उतार लेते हैं। अधिकतर मौतों का कारण सिर में गंभीर चोट लगना रहा है। ऐसे में सुरक्षित सफर करने के लिए वाहन चालकों को भी जागरूक होना पडे़गा।
- प्रदीप कुमार राय, एसपी ट्रैफिक