ऋषिकेश में पर्यटक का शराब पीना पड़ा भारी, मौत
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उत्तराखंड में ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम क्षेत्र में एक होटल में ठहरे यात्री की अचानक तबियत बिगड़ गई। उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि शराब पीने के बाद हालत बिगड़ी थी।
शराब होटल में ही कार्यरत एक युवक से दो सौ रुपये देकर मंगाई गई थी। बहरहाल, पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए हरिद्वार भेज दिया है। पुलिस ने बताया कि पीएम रिपोर्ट में ही मौत की वजह स्पष्ट हो पाएगी।
बीते बृहस्पतिवार को नरेंद्र कुमार (35) पुत्र रामस्वरूप निवासी अलीपुर गांव, सी-पांच-110 नरेला, दिल्ली अपने नौ वर्षीय बेटे मुकुल और दोस्त विजय के साथ लक्ष्मणझूला घूमने आया था। बताया जा रहा है कि क्षेत्र भ्रमण के बाद उन्होंने स्वर्गाश्रम क्षेत्र के एक चर्चित होटल में कमरा लिया।
ऋषिकेश में प्रतिबंधित है शराब
दोस्त विजय ने बताया कि रात करीब आठ बजे होटल में काउंटर के पास बैठे एक युवक से शराब उपलब्ध होने के बारे में जानकारी ली तो उसने हामी भर दी। दो सौ रुपये लिए और एक बोतल में शराब भरकर ले आया। दोनों ने शराब पी, तभी नरेंद्र तड़पने लगा।
उसे ऋषिकेश स्थित एसपीएस सरकारी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बकौल विजय, शराब पीने के बाद वह भी बेसुध हो गया था। सुबह उसकी आंख खुली। अस्पताल पहुंचा तो वहां नरेंद्र मोर्चरी में मृत हालत में मिला।
शव देखकर फफक पड़ा मासूम
मृत पिता को देख मासूम मुकुल फफक पड़ा। उसे लोगों ने किसी तरह ढांढस देकर चुप कराया। मासूम ने जो बताया उससे सभी चौंक गए। मुकुल ने बताया कि पापा और अंकल ने होटल में मौजूद एक युवक को दो सौ रुपये देकर शराब मंगाई थी।
शराब लाने वाला युवक गोरा और दुबला पतला था, जो खुली बोतल में शराब लेकर आया था। मासूम की बात पर यकीन करें तो इससे स्पष्ट है कि होटल में चोरी छिपे ग्राहकों को शराब उपलब्ध कराई जा रही है।
रास्ते में फेंक दी थी बोतल
मृतक नरेंद्र के दोस्त विजय ने बताया कि तीर्थनगरी में शराब प्रतिबंधित है। लिहाजा उन्होंने दिल्ली से एक शराब की बोतल खरीदी थी। रास्ते में आधी बोतल खत्म की। तीर्थनगरी में पुलिस चेकिंग के डर से आधी बोतल रास्ते में ही फेंक दी।
जब दोनों यात्री होटल में पहुंचे तो नशे में थे। होटल में किसी से शराब खरीदी यह संज्ञान में नहीं है। यदि उन्होंने होटल से भी शराब खरीदकर पी है तो इसकी जांच की जाएगी और संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।
-अमरजीत सिंह, प्रभारी निरीक्षक, लक्ष्मणझूला थाना
यहां ठेकों से ज्यादा बिकती है शराब
तीर्थनगरी ऋषिकेश को शासन ने मद्य निषेध क्षेत्र घोषित किया है। मगर, यहां शराब की तस्करी धड़ल्ले से हो रही है। स्थिति यह कि शराब की खपत इतनी देसी और अंग्रेजी शराब के ठेकों में नहीं होगी, जितनी शहर में होती है।
इसकी तस्दीक स्वर्गाश्रम क्षेत्र में होटल में यात्रियों को उपलब्ध कराई शराब कर रही है। यात्री ने दो सौ रुपये दिए और सुगमता से शराब मिल गई। सवाल उठता है कि अवैध शराब की तस्करी पर रोक लगाने वाले उदासीन क्यों हैं? कहीं इनकी सरपरस्ती में तो गोरखधंधा नहीं चल रहा।
ऋषिकेश, स्वर्गाश्रम, तपोवन, लक्ष्मणझूला और नीलकंठ क्षेत्र में शराब की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यह प्रतिबंध छलावा भर है। इन क्षेत्रों में कहीं चोरी छिपे तो कहीं धड़ल्ले शराब का धंधा फल-फूल रहा है। भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो कई सफेदपोश भी इस धंधे से जुड़े हैं।
तीर्थनगरी में रेलवे रोड, चंद्रेश्वरनगर, चंद्रभागा, इंदिरानगर, संयुक्त यात्रा बस अड्डा, छोटी सब्जी मंडी, बाबा सदानंद मार्ग पर ऐसे कई अड्डे हैं, जहां शाम ढलते ही धंधेबाज सक्रिय हो जाते हैं, जो शराब के शौकीनों को आसानी से शराब उपलब्ध करा देते हैं। इतना जरूर है कि धंधेबाज मनमाना दाम वसूलते हैं।
सवाल उठता है कि जब समूचा क्षेत्र मद्य निषेज्ञ है तो शराब की तस्करी कैसे हो रही। सूत्रों की मानें तो तस्करी पर रोक लगाने वाले ही अपनी जेब गर्म कर अवैध धंधे को शह दे रहे हैं। अवैध शराब की तस्करी में मिलावटी शराब की आशंका रहती है।
रेलवे की भूमि पर खुलेआम चल रहा बार
रेलवे स्टेशन मार्ग पर ग्रेफ कैंप के ठीक सामने रेलवे की खाली जमीन पर शाम ढलते ही मोमो, चाऊमीन और नॉनवेज की ठेलियां सज जाती हैं, जहां खुलेआम शराब पीने और पिलाने का दौर चलता है। यहां शराब कहां से आती है। पीने और पिलाने पर कार्रवाई क्यों नहीं होती, यह सवाल यहां से गुजरने वाले लोगों को कचोटता है। ऐसे में तीर्थनगरी की धार्मिक आस्था भी प्रभावित हो रही है।
चेकिंग पर उठ रहे सवाल
कोतवाली पुलिस और आबकारी विभाग शराब तस्करी को रोकने का दावा करते हैं, फिर स्वर्गाश्रम तक शराब कैसे पहुंच गई, यह चौंकाने वाली बात है। लक्ष्मणझूला क्षेत्र में सभी वाहन कोतवाली क्षेत्र से होकर ही गुजरते हैं।
13 लोग गंवा चुके हैं जान
16 सितंबर 1990 को तीर्थनगरी में जहरीली शराब पीने से 13 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक जहरीली शराब की सप्लाई लीसा डिपो मार्ग पर शराब बनाने के एक अवैध गोदाम से हुई थी। इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी पुलिस प्रशासन अभी तक शराब की तस्करी पर प्रभावी रोक नहीं लगा पाया है।