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बेजुबान भी बोले, बेटी ही बचाएगी
योगेश योगी/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 24 Jan 2014 08:59 PM IST
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अमर उजाला की बेटी ही बचाएगी मुहिम को मूक-बधिरों ने भी समर्थन दिया है। शुक्रवार को मुहिम को समर्थन देने के लिए कई शहरों से मूक-बधिर हरिद्वार में इकट्ठा हुए।
सभी ने अपने भाव व्यक्त करते हुए बेटी बचाने का संकल्प लिया। उन्होंने शपथ पत्र भरे और दिल की भावनाएं कागज पर उकेरी।
मोबाइल और फेसबुक से लोगों को जोड़ा
चंद्राचार्य चौक स्थित होटल हैरिटेज के संचालक संदीप अरोड़ा सबसे पहले अमर उजाला की मुहिम से जुड़े। अमर उजाला का बेटी बचाओ अभियान उन्हें इतना अच्छा लगा कि उन्होंने फेसबुक और मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से अपने ग्रुप के अन्य लोगों को भी इस अभियान से जुड़ने की अपील की।
विभिन्न शहरों से आए समर्थन में
इसके लिए उन्होंने साथियों को हरिद्वार आने का न्यौता दिया। शुक्रवार को देहरादून, रुड़की, सहारनपुर, मंगलौर, बहादराबाद और खतौली (मुजफ्फरनगर) से 14 मूक-बधिर हरिद्वार के होटल हैरिटेज में एकत्रित हुए। उन्होंने यहां पर शपथ पत्र भरकर बेटी बचाने की शपथ ली।
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उन्होंने लिखा कि हम भले ही बोलकर कुछ नहीं कह सकते लेकिन हमारी भावनाएं भी अन्य इंसानों की तरह ही हैं। हम समाज की भलाई के लिए अन्य इंसानों से ज्यादा सोचते हैं।
इन्होंने लिखा-
मुझे खुशी है कि मूक-बधिर लोग मेरे आहवान पर बेटी बचाओ अभियान का हिस्सा बने। ये लोग कुछ ना बोलकर भी सब कुछ बोल गए। मैं तहेदिल से इनका आभार व्यक्त करता हूं।
- संदीप अरोड़ा, कार्यक्रम संयोजक
मेरी भी एक बेटी है। मैं चाहूंगा कि वह बड़ी होकर दहेज प्रथा को समाप्त करने का बीड़ा उठाए। मैं उसे इस काबिल बनाने की कोशिश करुंगा।
- सरदार मोंटू, हरिद्वार
मेरे घर एक बेटा है। बेटी की कमी हमेशा खलती है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि अगले जन्म मेरे घर में एक बेटी जरुर देना।
- दीपक जोशी, रेशममाजरी, देहरादून
भगवान मुझे एक बेटी जरुर दे। ताकि मैं उसे पढ़ा-लिखाकर काबिल बना सकूं। मेरी बेटी आईएएस बनकर समाज से लड़का-लड़की का भेद मिटाए, ऐसी मेरी चाहत है।
- कोटिल्या कात्यायन, खतौली, मुजफ्फरनगर
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सभी ने अपने भाव व्यक्त करते हुए बेटी बचाने का संकल्प लिया। उन्होंने शपथ पत्र भरे और दिल की भावनाएं कागज पर उकेरी।
मोबाइल और फेसबुक से लोगों को जोड़ा
चंद्राचार्य चौक स्थित होटल हैरिटेज के संचालक संदीप अरोड़ा सबसे पहले अमर उजाला की मुहिम से जुड़े। अमर उजाला का बेटी बचाओ अभियान उन्हें इतना अच्छा लगा कि उन्होंने फेसबुक और मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से अपने ग्रुप के अन्य लोगों को भी इस अभियान से जुड़ने की अपील की।
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विभिन्न शहरों से आए समर्थन में
इसके लिए उन्होंने साथियों को हरिद्वार आने का न्यौता दिया। शुक्रवार को देहरादून, रुड़की, सहारनपुर, मंगलौर, बहादराबाद और खतौली (मुजफ्फरनगर) से 14 मूक-बधिर हरिद्वार के होटल हैरिटेज में एकत्रित हुए। उन्होंने यहां पर शपथ पत्र भरकर बेटी बचाने की शपथ ली।
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उन्होंने लिखा कि हम भले ही बोलकर कुछ नहीं कह सकते लेकिन हमारी भावनाएं भी अन्य इंसानों की तरह ही हैं। हम समाज की भलाई के लिए अन्य इंसानों से ज्यादा सोचते हैं।
इन्होंने लिखा-
मुझे खुशी है कि मूक-बधिर लोग मेरे आहवान पर बेटी बचाओ अभियान का हिस्सा बने। ये लोग कुछ ना बोलकर भी सब कुछ बोल गए। मैं तहेदिल से इनका आभार व्यक्त करता हूं।
- संदीप अरोड़ा, कार्यक्रम संयोजक
मेरी भी एक बेटी है। मैं चाहूंगा कि वह बड़ी होकर दहेज प्रथा को समाप्त करने का बीड़ा उठाए। मैं उसे इस काबिल बनाने की कोशिश करुंगा।
- सरदार मोंटू, हरिद्वार
मेरे घर एक बेटा है। बेटी की कमी हमेशा खलती है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि अगले जन्म मेरे घर में एक बेटी जरुर देना।
- दीपक जोशी, रेशममाजरी, देहरादून
भगवान मुझे एक बेटी जरुर दे। ताकि मैं उसे पढ़ा-लिखाकर काबिल बना सकूं। मेरी बेटी आईएएस बनकर समाज से लड़का-लड़की का भेद मिटाए, ऐसी मेरी चाहत है।
- कोटिल्या कात्यायन, खतौली, मुजफ्फरनगर