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OMG: अलकनंदा में बह रहा 'जहर' और आप उसे पी रहे हैं

Mon, 12 Oct 2015 08:10 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, श्रीनगर
ब्यूरो / अमर उजाला, श्रीनगर Updated Mon, 12 Oct 2015 08:10 AM IST
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dead body flows in alaknanda river.

जी हां, जो अलकनंदा नदी उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल के लोगों की प्यास बुझा रही है, उसमें 'जहर' तैर रहा है।

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श्रीनगर (गढ़वाल) जल विद्युत परियोजना के बैराज गेट पर मनुष्यों और जानवरों के सड़े-गले शव अटक रहे हैं। इससे यहां सड़न फैल रही है। जाहिर सी बात है कि इसका असर पानी पर पड़ रहा है।

दिक्कत यह है कि श्रीकोट, श्रीनगर और पौड़ी क्षेत्र की जनता बैराज के बाद का ही पानी पीती है। ऐसे में बीमारियों की फैलने की आशंका है। विधायक श्रीनगर गणेश गोदियाल और कीर्तिनगर पुलिस ने भी बैराज की सफाई के लिए परियोजना कंपनी को पत्र भेजे हैं।
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इधर, कंपनी प्रबंधन का कहना है कि एक सप्ताह के अंतर्गत इस समस्या का निराकरण करा लिया जाएगा। इसी वर्ष फरवरी-मार्च माह से जल विद्युत परियोजना के लिए झील में पानी का रुकना शुरू हुआ है।
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कोटेश्वर से नौर तक अलकनंदा नहर से गुजर रही है। जबकि अलकनंदा के मूल प्रवाह क्षेत्र में बैराज के बाद से पावर हाउस तक बहुत कम पानी बह रहा है। इसी क्षेत्र में श्रीकोट, पौड़ी और श्रीनगर की पंपिंग पेयजल योजनाएं हैं।

बैराज गेट में फंस रहे शव

dead body flows in alaknanda river.

समस्या यह है कि अलकनंदा और उसकी सहायक नदियों में बहकर आने वाले मनुष्यों और जानवरों के मृत शरीर बैराज गेट में फंस रहे हैं।

मनुष्यों के शव तो कई दिन पानी में रहने के बाद निकाल दिए जा रहे हैं लेकिन जानवरों के शवों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। यदि कंपनी गेट खोलकर इन शवों को बहा भी रही है तो पानी का वेग कम होने के कारण यह शव पंप हाउसों के निकट पहुंच रहे हैं।

परियोजना कंपनी को मनुष्यों के शव मिलने पर तत्काल सूचना देने के लिए कहा गया है। साथ ही जानवरों के मृत शरीरों के निस्तारण का भी अनुरोध किया गया है। पिछले दिनों शव निकालने गई पुलिस की टीम को भयंकर दुर्गंध का सामना करना पड़ा था।
- सीएस बिष्ट, कोतवाल कीर्तिनगर

कंपनी को नदी में पर्याप्त पानी छोडने के निर्देश दिए गए हैं। बैराज की नियमित सफाई होनी जरूरी है।
- गणेश गोदियाल, विधायक श्रीनगर

बैराज की सफाई कराई जाती है। अन्य परियोजनाओं में किस प्रकार मृत जानवरों के शवों का निस्तारण किया जाता है, इसका अध्ययन चल रहा है। उम्मीद है कि एक हफ्ते के अंतर्गत कुछ न कुछ समाधान निकल जाएगा।
- वाईआर शर्मा, जनसंपर्क अधिकारी, एएचपीसीएल

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