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इनके ‘हठयोग’ से जमीन ने उगला ‘सोना’

Mon, 17 Feb 2014 01:36 PM IST
नरेश थपलियाल/ अमर उजाला, कोटद्वार
नरेश थपलियाल/ अमर उजाला, कोटद्वार Updated Mon, 17 Feb 2014 01:36 PM IST
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crop grown on the barren land

मन में कुछ करने का जुनून और जज्बा हो तो बंजर जमीन भी ‘सोना’ उगल सकती है। पौड़ी जिले के योगेश्वर प्रसाद बडोला ने इसे मुमकिन कर दिखाया।

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हिमाचल में कंस्ट्रक्शन की नौकरी छोड़कर गांव वापस आए और बागबानी में ऐसा ‘हठयोग’ दिखाया कि नौ साल में ही उनकी बंजर जमीन सेब, माल्टा, बादाम, कागजी नींबू के पौधों से लहलहाने लगी।

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सिर पर सवार था बागबानी का जुनून

crop grown on the barren land

पौड़ी जनपद के नैनीडांडा ब्लॉक के किनगोड़ीखाल (खाल्यूं) निवासी योगेश्वर प्रसाद 1978 में नौकरी तलाशते हिमाचल पहुंचे। वहां रामपुर बुशहर में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी करनी शुरू कर दी।

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हाड़तोड़ मेहनत के बाद महीने में मिलते थे आठ हजार रुपए। 27 साल नौकरी की। लगा नौकरी में परिवार का गुजरा मुश्किल है। सोचा कुछ और किया जाए। रामपुर बुशहर बागवानी के लिहाज से काफी समृद्ध है।

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उन्होंने वहां के बागबानों के तौर-तरीके देखे और उनकी समृद्धि भी। वर्ष 2005 में नौकरी छोड़ दी और गांव आ गए। यहां उनकी 150 नाली बंजर में तब्दील हो चुकी थी।

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लेकिन बागबानी का जुनून सिर पर सवार था। उद्यान विभाग की मदद ली और फलों की खेती में जुट गए।

पेड़ों के रूप में तनकर खड़े हैं हौसले

crop grown on the barren land

योगेश्वर के हौसले फलदार पेड़ों के रूप में उनके बगीचे में तनकर खड़े हैं। उनके बाग में सेब के 1500, कागजी नींबू के 200, अखरोट के 250, माल्टा के 30 और बादाम के पांच पेड़ हैं।

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योगेश्वर ने और बंजर भूमि पर पेड़ों के लिए खुद ही गड्ढे खोदे। फलदार पौधों के लिए नैनीडांडा से कोटद्वार तक 150 किलोमीटर जिला उद्यान विभाग के चक्कर काटे। शुरुआत में कई पौधे सूख भी गए। इसके बाद भी हार नहीं मानी।

गुजरात सरकार ने किया सम्मानित

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पिछले साल बाग से लगभग 60 पेड़ों पर सेब की पहली फसल आई। जिससे लगभग 40 हजार की आमदनी हुई। इस साल सेब के सभी पेड़ फल देने लगेंगे। उम्मीद है कि उनकी आमदनी में और इजाफा होगा।

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योगेश्वर को अहमदाबाद में आयोजित एग्रीकल्चर ग्लोबल समिट में उदीयमान किसान के रूप में 51 हजार रुपये की धनराशि और प्रशस्तिपत्र से सम्मानित भी किया गया है।

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योगेश्वर प्रसाद ने बेरोजगारों और किसानों को नई राह दिखाई है। अपने कठिन परिश्रम के कारण वे विभाग का गौरव भी बढ़ा रहे हैं।
- एसके सिंह, जिला उद्यान अधिकारी

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